Telegram Ban NEET UG Delhi HC Hearing: 15 करोड़ यूजर्स बनाम परीक्षा की सुरक्षा, दिल्ली हाई कोर्ट में फैसला सुरक्षित

Published on: 18-06-2026
दिल्ली हाईकोर्ट में टेलीग्राम बैन और NEET-UG 2026 सुनवाई का प्रतीकात्मक दृश्य

नई दिल्ली – Telegram Ban NEET UG Delhi HC Hearing मामले में आज दिल्ली उच्च न्यायालय में एक बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील मोड़ आया है। 21 जून 2026 को होने वाली नीट-यूजी (NEET-UG) की दोबारा परीक्षा से ठीक तीन दिन पहले, केंद्र सरकार ने मैसेंजिंग ऐप टेलीग्राम पर लगाए गए अस्थाई प्रतिबंध को पूरी तरह से सही ठहराया है। न्यायमूर्ति तेजस कारिया की वेकेशन बेंच के सामने चली इस लंबी और तीखी बहस के बाद हाई कोर्ट ने अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। सरकार का कहना है कि परीक्षा की गरिमा बनाए रखने और किसी भी प्रकार के पेपर लीक या साइबर फ्रॉड को रोकने के लिए यह कदम उठाना बेहद जरूरी था, जबकि टेलीग्राम ने इसे 15 करोड़ भारतीय यूजर्स के मौलिक अधिकारों का हनन बताया है।

सरकार की दलील: ‘टेलीग्राम के पास बोट इंफ्रास्ट्रक्चर, अपराधियों को पकड़ना नामुमकिन’

सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि टेलीग्राम का आंतरिक ढांचा (Architecture) ऐसा है जो कानून लागू करने वाली एजेंसियों के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (I4C) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए सॉलिसिटर जनरल ने कहा कि टेलीग्राम पर एक अकेला अकाउंट 40 अलग-अलग बोट्स (Bots) बना सकता है। ये बोट्स इंसानी दखल के बिना बहुत ही कम समय में बड़े पैमाने पर संदेशों और संवेदनशील सामग्रियों को लाखों लोगों तक फैला सकते हैं।

NEET-UG पुनर्परीक्षा के लिए सुरक्षा व्यवस्था (प्रतीकात्मक AI-निर्मित चित्र)

सरकार ने अदालत को स्पष्ट किया कि टेलीग्राम पूरी तरह से क्लाउड-आधारित प्लेटफॉर्म है। यदि कोई व्यक्ति इस ऐप पर कोई अवैध गतिविधि या पेपर लीक जैसा अपराध करता है, तो देश की सुरक्षा एजेंसियों के लिए उसके मूल आईपी एड्रेस या वास्तविक उपयोगकर्ता तक पहुंचना लगभग असंभव हो जाता है। सरकार के अनुसार, पिछले अनुभवों को देखते हुए यह पाया गया है कि टेलीग्राम का इस्तेमाल संगठित तौर पर परीक्षा से जुड़े फ्रॉड, फर्जी प्रश्न पत्र बेचने और वित्तीय धोखाधड़ी के लिए बार-बार किया जा रहा है।

टेलीग्राम का पक्ष: ‘900 से ज्यादा लिंक हटाए, पूरी ऐप ब्लॉक करना गलत’

दूसरी तरफ, टेलीग्राम की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव मेहता ने सरकार के इस कदम को पूरी तरह से मनमाना और असंवैधानिक करार दिया। टेलीग्राम के वकील ने दलील दी कि सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) की धारा 69A के तहत सरकार को किसी विशिष्ट अवैध सामग्री या लिंक को ब्लॉक करने का अधिकार है, न कि पूरी की पूरी एप्लिकेशन को ही बंद कर देने का। उन्होंने कहा कि टेलीग्राम ने सरकार और राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) के साथ लगातार सहयोग किया है।

अदालत को बताया गया कि 1 जून से चल रही बैठकों के बाद टेलीग्राम ने अपनी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) तकनीकों और मैन्युअल चेकिंग के जरिए नीट परीक्षा से जुड़े 900 से अधिक आपत्तिजनक लिंक्स को हटा दिया था। टेलीग्राम के वकील ने दलील दी, “भारत में हमारे 15 करोड़ से अधिक सक्रिय यूजर्स हैं। इनमें बड़ी संख्या में छात्र हैं जो अपनी पढ़ाई की सामग्री जुटाते हैं, शिक्षक हैं जो कोचिंग देते हैं, और छोटे व्यवसायी हैं जिनका पूरा काम इसी प्लेटफॉर्म पर निर्भर है। कुछ शरारती तत्वों की वजह से देश के करोड़ों नागरिकों के डिजिटल अधिकारों को छीनना पूरी तरह से असंगत है।”

टेलीग्राम के संस्थापक की प्रतिक्रिया

टेलीग्राम के संस्थापक पावेल ड्यूरोव ने सार्वजनिक रूप से प्रतिबंध की आलोचना की है। उनका कहना है कि इस कदम से करोड़ों सामान्य उपयोगकर्ता प्रभावित हुए हैं जबकि गलत काम करने वाले लोग दूसरे प्लेटफॉर्म का उपयोग कर सकते हैं। कंपनी का दावा है कि वह अवैध गतिविधियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए तैयार है और प्लेटफॉर्म को पूरी तरह प्रतिबंधित करना समस्या का दीर्घकालिक समाधान नहीं है।

हाई कोर्ट की टिप्पणी: ‘कुछ लोगों की परीक्षा के लिए 15 करोड़ नागरिकों के अधिकार कैसे छीन सकते हैं?’

सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति तेजस कारिया की पीठ ने भी सरकार की इस कार्रवाई के अनुपात (Proportionality) पर गंभीर सवाल उठाए। अदालत ने मौखिक टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या देश के नागरिकों का एक हिस्सा परीक्षा दे रहा है, तो इस आधार पर पूरे देश के 15 करोड़ लोगों के अधिकारों को सीमित किया जा सकता है? कोर्ट ने पूछा कि क्या संपूर्ण प्लेटफॉर्म को प्रतिबंधित करना ही एकमात्र रास्ता बचा था।

इस पर सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने जवाब दिया कि सरकार के पास ऐसे ‘चौंकाने वाले सबूत’ (Shocking Material) मौजूद हैं जो यह दिखाते हैं कि टेलीग्राम पर जैसे ही एक अवैध चैनल बंद किया जाता था, तुरंत एक नया चैनल क्यूआर कोड (QR Code) के साथ सक्रिय हो जाता था जहाँ छात्र पैसे देकर फर्जी या कथित लीक प्रश्न पत्र खरीद रहे थे। उन्होंने कहा कि नीट परीक्षा देश के 22 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य और उनकी भावनाओं से जुड़ी हुई है, और मई के महीने में मूल परीक्षा रद्द होने के बाद देश में दोबारा ऐसी स्थिति पैदा न हो, इसलिए यह आपातकालीन कदम ‘अंतिम उपाय’ के तौर पर उठाया गया है।

नए IT नियम 2021 और धारा 69A का कानूनी संदर्भ

सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 69A का प्रतीकात्मक AI-निर्मित चित्र

यह पूरा मामला सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यवर्ती दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 के तहत आता है। सरकार ने इन नियमों के तहत आपातकालीन शक्तियों का उपयोग करते हुए टेलीग्राम को 22 जून 2026 तक भारत में अस्थाई रूप से ब्लॉक करने का आदेश दिया है। इसके अलावा, सरकार ने टेलीग्राम को निर्देश दिया है कि वह 30 जून तक भारत में संदेशों को एडिट (Edit Feature) करने की सुविधा पर भी रोक लगाए, क्योंकि अपराधी पुराने मैसेज को एडिट करके छात्रों को गुमराह कर रहे थे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: टेलीग्राम पर प्रतिबंध क्यों लगाया गया है और यह कब तक रहेगा?

उत्तर: केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) की सिफारिश पर टेलीग्राम पर यह अस्थाई प्रतिबंध लगाया है। मुख्य कारण 21 जून 2026 को होने वाली नीट-यूजी (NEET-UG) पुनरीक्षा के दौरान पेपर लीक, फर्जी प्रश्न पत्रों की बिक्री और साइबर धोखाधड़ी को रोकना है। सरकार के आदेश के मुताबिक यह प्रतिबंध फिलहाल 22 जून 2026 तक लागू रहने की बात कही गई है, बशर्ते दिल्ली हाई कोर्ट इस पर कोई अलग आदेश न दे।

प्रश्न 2: दिल्ली हाई कोर्ट में चल रहे इस मामले में टेलीग्राम का मुख्य विरोध क्या है?

उत्तर: टेलीग्राम का कहना है कि वह एक मध्यवर्ती (Intermediary) है और सरकार द्वारा बताए गए सभी 900 से अधिक संदिग्ध लिंक्स को उसने अपने प्लेटफॉर्म से हटा दिया है। टेलीग्राम के अनुसार, सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम (IT Act) के नियम केवल विशिष्ट अवैध सामग्री को ब्लॉक करने की इजाजत देते हैं। पूरी ऐप को ब्लॉक करना भारत के 15 करोड़ आम यूजर्स के काम, शिक्षा और संचार के मौलिक अधिकार (अनुच्छेद 14 और 19) का उल्लंघन है।

प्रश्न 3: सरकार ने टेलीग्राम के ‘बोट इंफ्रास्ट्रक्चर’ (Bot Infrastructure) को लेकर कोर्ट में क्या चिंता जताई?

उत्तर: सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल ने बताया कि टेलीग्राम की क्लाउड-आधारित तकनीक और इसका बोट आर्किटेक्चर सुरक्षा एजेंसियों के लिए बड़ी समस्या है। टेलीग्राम पर एक खाता 40 बोट्स बना सकता है जो बिना इंसानी नियंत्रण के बहुत तेजी से लाखों लोगों तक लीक सामग्री पहुंचा सकते हैं। इसके अलावा, डेटा क्लाउड पर होने के कारण मुख्य अपराधी या यूजर का वास्तविक स्थान (Location) ट्रैक करना बहुत मुश्किल होता है।

प्रश्न 4: क्या नीट परीक्षा से जुड़े छात्रों पर इस टेलीग्राम बैन का कोई असर पड़ेगा?

उत्तर: हाँ, बहुत से छात्र टेलीग्राम समूहों के माध्यम से पढ़ाई की सामग्री (Study Material), नोट्स और मॉक टेस्ट साझा करते हैं, जिन्हें इस प्रतिबंध के कारण परेशानी हो रही है। हालांकि, सरकार और एनटीए का मानना है कि परीक्षा की शुचिता और गोपनीयता बनाए रखने के लिए छात्रों के व्यापक हित में यह कड़ा कदम उठाना आवश्यक था।

प्रश्न 5: क्या अदालत ने फैसला सुना दिया है?

उत्तर: 18 जून 2026 तक उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार अदालत ने फैसला सुरक्षित रखा है। अंतिम आदेश का इंतजार है।

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