Cockroach Janta Party Jantar Mantar Protest: नीट पेपर लीक और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली में भारी बवाल, सोनम वांगचुक ने दिया अल्टीमेटम, रात में भी CJP का प्रदर्शन जारी

Published on: 20-06-2026
जंतर-मंतर पर थाली-चम्मच बजाते Cockroach Janta Party के समर्थक

नई दिल्ली – Cockroach Janta Party Jantar Mantar Protest ने आज देश की राजधानी दिल्ली के राजनीतिक तापमान को सातवें आसमान पर पहुंचा दिया है। राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG) 2026 में कथित अनियमितताओं, परीक्षा से पहले बड़े पैमाने पर पेपर लीक होने और छात्रों के भविष्य के साथ हुए खिलवाड़ के खिलाफ युवाओं और छात्रों के सबसे बड़े डिजिटल आंदोलन ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) ने शनिवार को जंतर-मंतर पर अपना दूसरा ऐतिहासिक जमीनी प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शन के कारण मध्य दिल्ली और जंतर-मंतर के आसपास के रास्तों पर भारी सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा। देश के अलग-अलग कोनों जैसे बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और खुद दिल्ली विश्वविद्यालय व जेएनयू के सैकड़ों छात्र हाथों में थाली, चम्मच, किताबें और तिरंगा लेकर इस अनोखे आंदोलन का हिस्सा बनने पहुंचे।

इस Cockroach Janta Party Jantar Mantar Protest की सबसे बड़ी और चौंकाने वाली बात यह रही कि इसमें प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक और पर्यावरण कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। उन्होंने मंच से छात्रों को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार को खुली चेतावनी दे दी है। वांगचुक ने कहा कि यदि सरकार आगामी 27 जून 2026 तक देश की शिक्षा व्यवस्था में सुधार और इस धांधली की जिम्मेदारी तय नहीं करती है, तो वह छात्रों के हक में एक अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल (Indefinite Fast) शुरू कर देंगे। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए “गो प्रधान गो” के गगनभेदी नारे लगाए और विरोध स्वरूप थाली-चम्मच बजाए।

क्या है कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और क्यों उपजा यह गुस्सा?

प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते अभिजीत दिपके

इस पूरे घटनाक्रम को समझने के लिए हमें थोड़ा पीछे जाना होगा। दरअसल, मई 2026 के मध्य में भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की एक टिप्पणी के बाद इस संगठन की शुरुआत एक व्यंग्यात्मक (Satirical) ऑनलाइन अभियान के रूप में हुई थी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान कुछ कार्यकर्ताओं और बेरोजगार युवाओं को कथित तौर पर “कॉकरोच” और “समाज का परजीवी” कहे जाने के बाद, डिजिटल कूटनीति रणनीतिकार अभिजीत दीपके ने 16 मई 2026 को इस ‘अपमान’ को एक आंदोलन में बदल दिया और ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ की नींव रखी। देखते ही देखते कुछ ही हफ्तों में सोशल मीडिया पर इसके 20 मिलियन से अधिक फॉलोअर्स हो गए और देश के करोड़ों बेरोजगार व परेशान युवा इसके बैनर तले एकजुट हो गए।

शुरुआत में केवल सोशल मीडिया पर रील्स और मीम्स के जरिए सरकार पर तंज कसने वाला यह संगठन जून आते-आते एक बड़े छात्र आंदोलन में तब्दील हो गया। इसकी मुख्य वजह बनी साल 2026 की नीट-यूजी परीक्षा और अन्य राष्ट्रीय परीक्षाओं (जैसे सीबीएसई ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद और एसएससी) में हुई भारी गड़बड़ियां। देश के लाखों छात्र जो सालों तक दिन-रात मेहनत करते हैं, उनके सपने जब पेपर लीक के कारण टूटे, तो कॉकरोच जनता पार्टी ने इसे अपना मुख्य एजेंडा बना लिया और सड़कों पर उतरने का फैसला किया। 6 जून को हुए पहले प्रदर्शन के बाद आज 20 जून को यह दूसरा बड़ा प्रदर्शन था।

विश्लेषकों का मानना है कि यह संगठन दक्षिण एशिया में सोशल मीडिया से जन्मे युवा आंदोलनों के उसी रुझान का हिस्सा है, जो श्रीलंका, बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में सरकार विरोधी प्रदर्शनों की वजह बने थे। यह अभी देखा जाना बाकी है कि क्या यह व्यंग्य और मीम-आधारित आंदोलन एक स्थायी संगठित राजनीतिक ताकत में तब्दील हो पाएगा या नहीं।

थाली और चम्मच लेकर पहुंचे छात्र: पीएम मोदी के पुराने आह्वान से जोड़ा

थाली-चम्मच बजाते प्रदर्शनकारी

आज सुबह 11 बजे से ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों का हुजूम जुटना शुरू हो गया था। सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने प्रदर्शन से एक दिन पहले सोशल मीडिया पर एक विशेष वीडियो जारी कर सभी समर्थकों से अपने साथ एक ‘थाली’ और एक ‘चम्मच’ लाने की भावुक अपील की थी। जब दोपहर 1 बजे प्रदर्शन आधिकारिक रूप से शुरू हुआ, तो पूरा जंतर-मंतर बर्तनों की खटखटाहट और “धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दो” के नारों से गूंज उठा।

आंदोलनकारियों का कहना है कि थाली और चम्मच बजाने का यह तरीका प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्च 2020 के उस आह्वान की याद दिलाता है, जिसमें उन्होंने कोरोना महामारी के दौरान फ्रंटलाइन वर्कर्स का आभार जताने के लिए देशवासियों से बर्तन बजाने को कहा था। छात्रों ने व्यंग्य करते हुए कहा कि आज वे देश की शिक्षा व्यवस्था में लगे “धर्मेंद्र प्रधान नाम के वायरस” को भगाने के लिए यह थाली और चम्मच बजा रहे हैं। प्रदर्शन के दौरान कई युवा कॉकरोच के मास्क पहनकर और अपनी किताबों को हवा में लहराकर अपना शांतिपूर्ण विरोध दर्ज कराते दिखे।

सोनम वांगचुक की एंट्री और सरकार को 27 जून का अल्टीमेटम

इस विरोध प्रदर्शन को तब और ज्यादा मजबूती मिली जब लद्दाख के प्रसिद्ध एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक जंतर-मंतर के मंच पर पहुंचे। उन्होंने बिखरी हुई और उग्र हो रही भीड़ को बेहद संजीदगी और शांति के साथ संबोधित किया। वांगचुक ने कहा, “देश का युवा आज सड़कों पर है क्योंकि जो संस्थाएं परीक्षाएं कराती हैं, वे अपनी जवाबदेही से भाग रही हैं। हर बार तकनीकी खराबी का बहाना बनाकर लाखों बच्चों का भविष्य दांव पर लगा दिया जाता है।”

वांगचुक ने मंच से घोषणा की कि वह देश के छात्रों को अकेला नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा, “मैं सरकार को 27 जून 2026 तक का समय दे रहा हूं। अगर इस तारीख तक शिक्षा मंत्रालय और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने अपनी गलतियां स्वीकार नहीं कीं और छात्रों के हितों की रक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए, तो मैं यहीं दिल्ली में देश के युवाओं के लिए अनिश्चितकालीन अनशन पर बैठूंगा।” उनके इस बयान के बाद जंतर-मंतर पर मौजूद छात्रों का जोश दोगुना हो गया।

देश के कोने-कोने से आए पीड़ित छात्रों और प्रदर्शनकारियों की आपबीती

विभिन्न राज्यों से आए छात्रों ने अपनी मांगें रखीं

इस आंदोलन में राजनीति से इतर उन आम छात्रों और उनके परिवारों का दर्द साफ देखा जा सकता था, जो इस परीक्षा प्रणाली के शिकार हुए हैं। इस पत्रकार ने ज़मीनी स्तर पर कई प्रदर्शनकारियों से बात की:

  • हुनर जैन (18 वर्ष, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा): “मेरी एक सहेली ने पिछले साल नीट के लिए ड्रॉप लिया था। उसने पैरामेडिकल और नीट की तैयारी के लिए दिन-रात एक कर दिया था। मई में जब वह पेपर देकर आई तो बेहद खुश थी कि उसका सिलेक्शन हो जाएगा। लेकिन कुछ ही दिनों बाद पेपर लीक की खबर आई। पिछले एक महीने से हम सब मिलकर उसे डिप्रेशन से बाहर निकालने की कोशिश कर रहे हैं। उसका अब किसी भी दूसरी परीक्षा में बैठने का मन नहीं कर रहा है। सरकार को हमारे मानसिक तनाव का अंदाज़ा भी नहीं है।”
  • रणविजय (जेएनयू के पीएचडी स्कॉलर): “सरकार री-नीट कराने के लिए प्रश्नपत्रों को एयरलिफ्ट करने और टेलीग्राम ऐप पर बैन लगाने में अपनी पूरी ताकत झोंक रही है। टैक्सपेयर्स का करोड़ों रुपया बर्बाद हो रहा है। हमारा सीधा सवाल है कि सरकार खुद पारदर्शी तरीके से परीक्षाएं क्यों नहीं करा सकती? परीक्षाओं का काम ऐसी बाहरी एजेंसियों को क्यों आउटसोर्स किया जा रहा है जिनकी संसद या जनता के प्रति कोई जवाबदेही ही नहीं है?”
  • गौतम बाबू (28 वर्ष, बिहार से आए न्यायिक सेवा अभ्यर्थी): “जब भी किसी परीक्षा में धांधली या पेपर लीक होता है, तो एनटीए (NTA) इसे केवल एक ‘तकनीकी खराबी’ या ‘लोकल समस्या’ बताकर पल्ला झाड़ लेता है। ये तकनीकी खामियां दरअसल अधिकारियों के लिए अपनी जिम्मेदारी से बचने का एक सुरक्षा कवच बन चुकी हैं। हम इसके खिलाफ आर-पार की लड़ाई के लिए बिहार से यहां आए हैं।”

जिम्मेदार पक्षों के आधिकारिक बयान और पक्ष

इस पूरे विवाद पर अलग-अलग पक्षों के आधिकारिक रुख इस प्रकार हैं:

  • अभिजीत दीपके (संस्थापक, कॉकरोच जनता पार्टी): “वे कह रहे थे कि सोशल मीडिया के कॉकरोच कभी जमीन पर नहीं उतरेंगे। आज जंतर-मंतर गवाह है कि जब देश के युवाओं के भविष्य पर बात आती है, तो वे घरों से निकलना जानते हैं। हमारा यह आंदोलन तब तक नहीं रुकेगा जब तक शिक्षा मंत्रालय में बैठे जिम्मेदार लोग इस्तीफा नहीं दे देते।”
  • केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय (धर्मेंद्र प्रधान का पक्ष): शिक्षा मंत्रालय के सूत्रों के अनुसार, सरकार परीक्षा प्रणाली में पूरी पारदर्शिता बरतने के लिए प्रतिबद्ध है। नीट मामले की जांच उच्च स्तरीय समिति को सौंपी गई है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। विपक्ष और कुछ संगठन इस संवेदनशील मुद्दे पर राजनीति कर रहे हैं।
  • जयराम रमेश (वरिष्ठ कांग्रेस नेता):”लाखों छात्रों और उनके परिवारों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करने के बाद भी शिक्षा मंत्री का अपने पद पर बने रहना इस देश के युवाओं का अपमान है। उन्हें तत्काल प्रभाव से बर्खास्त किया जाना चाहिए।”

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन बढ़ाने की अनुमति देने से किया इनकार, बिजली किया बंद

शनिवार शाम प्रदर्शन से जुड़ी सबसे बड़ी अपडेट यह रही कि दिल्ली पुलिस ने CJP को प्रदर्शन का समय बढ़ाने की अनुमति देने से इनकार कर दिया। इससे पहले डिपके ने समर्थकों से शाम 6 बजे तक प्रदर्शन में बने रहने की अपील की थी और उम्मीद जताई थी कि पुलिस अनुमति बढ़ा देगी। पुलिस के इनकार के बाद डिपके ने साफ कर दिया कि वे प्रदर्शन स्थल नहीं छोड़ेंगे। उन्होंने कहा कि देशभर से आए छात्र तब तक यहां बैठे रहना चाहते हैं जब तक उन्हें न्याय नहीं मिल जाता।

डिपके ने प्रशासन से अपील करते हुए कहा कि चूंकि पूरे देश से युवा यहां जमा हुए हैं, इसलिए दिल्ली पुलिस को उनकी अनुमति को आगे बढ़ाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा है और वे सिर्फ़ “मासूम छात्र” हैं जो यहां बैठना चाहते हैं। डिपके ने यह भी कहा कि बातचीत के लिए रास्ते खुले हैं, लेकिन इसकी एक ही शर्त है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना होगा। उन्होंने केंद्र सरकार से दिल्ली पुलिस के ज़रिए संवाद शुरू करने का अनुरोध भी किया।

प्रदर्शन समाप्त कराने को लेकर संभावित कार्रवाई पर बोलते हुए डिपके ने यह भी कहा कि अगर गिरफ्तारियां होती हैं, तो वे खुद सबसे पहले गिरफ्तारी देंगे। खबर लिखे जाने तक भी सजप प्रदर्शनकारी प्रदर्शन स्थल पर डटे हुए थे पुलिस ने प्रदर्शन स्थल का बिजली बंद कर दिया साथ में वाश रूम पर बेरिकेड लगा दिया और अन्दर पानी की बोतलें नहीं ले जाने दिया जा रहा है।

फिलहाल स्थिति यह है कि दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन की अनुमति को आगे बढ़ाने से इनकार कर दिया है, जबकि CJP प्रदर्शनकारी जंतर मंतर पर डटे हुए हैं। आने वाले घंटों में यह देखना अहम होगा कि प्रशासन इस गतिरोध को कैसे सुलझाता है—क्या बातचीत का कोई रास्ता निकलता है, या फिर पुलिस कार्रवाई की नौबत आती है।

क्या युवाओं का यह आक्रोश बदलेगा देश की शिक्षा नीति?

Cockroach Janta Party Jantar Mantar Protest केवल एक दिन का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह भारतीय परीक्षा प्रणाली और युवाओं के भीतर पनप रहे गहरे असंतोष का प्रतीक बन चुका है। एक इंटरनेट मीम और व्यंग्य से शुरू हुआ यह आंदोलन आज देश के सबसे बड़े नीतिगत मुद्दों को चुनौती दे रहा है। सोनम वांगचुक द्वारा दिए गए 27 जून के अल्टीमेटम ने अब गेंद पूरी तरह से केंद्र सरकार के पाले में डाल दी है। यदि आने वाले सप्ताह में सरकार छात्रों और सीजेपी की मांगों पर कोई ठोस निर्णय नहीं लेती है, तो यह आंदोलन देशव्यापी रूप अख्तियार कर सकता है, जिससे निपटना प्रशासन के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

प्रश्न 1: कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) क्या है और इसका गठन कब हुआ?

उत्तर: कॉकरोच जनता पार्टी एक युवा नेतृत्व वाला सामाजिक-राजनीतिक आंदोलन है, जिसकी शुरुआत 16 मई 2026 को अभिजीत दीपके द्वारा की गई थी। इसका गठन देश के मुख्य न्यायाधीश की उस कथित टिप्पणी के विरोध में एक व्यंग्य (Satire) के रूप में हुआ था जिसमें प्रदर्शनकारियों और बेरोजगारों को “कॉकरोच” कहा गया था। आज यह देश में पेपर लीक और बेरोजगारी के खिलाफ एक बड़ा मंच बन चुका है।

प्रश्न 2: 20 जून 2026 को जंतर-मंतर पर क्यों प्रदर्शन किया गया?

उत्तर: यह प्रदर्शन नीट-यूजी (NEET-UG) 2026 परीक्षा में हुई धांधली, बार-बार होने वाले पेपर लीक और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की विफलताओं के खिलाफ आयोजित किया गया था। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है।

प्रश्न 3: प्रदर्शन में ‘थाली और चम्मच’ बजाने का क्या महत्व है?

उत्तर: सीजेपी के समर्थकों ने थाली और चम्मच बजाकर सरकार के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराया। यह साल 2020 में कोरोना काल के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए बर्तन बजाने के संदेश का एक व्यंग्यात्मक रूप है, जिसके जरिए छात्र शिक्षा व्यवस्था की कमियों को उजागर कर रहे हैं।

प्रश्न 4: सोनम वांगचुक ने इस प्रदर्शन में क्या बड़ी घोषणा की है?

उत्तर: लद्दाख के प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक ने छात्रों के समर्थन में सरकार को 27 जून 2026 तक का अल्टीमेटम दिया है। यदि तब तक शिक्षा प्रणाली में जवाबदेही तय नहीं की गई, तो वह दिल्ली में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करेंगे।

प्रश्न 5: क्या इस आंदोलन का कोई चुनावी एजेंडा भी है?

उत्तर: सीजेपी के प्रवक्ताओं के अनुसार, वर्तमान में उनका कोई चुनाव लड़ने या राजनीतिक दल के रूप में स्थापित होने का इरादा नहीं है। उनका पूरा ध्यान केवल देश के छात्रों को न्याय दिलाना और शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता लाना है।

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