Pune Murder Case कुछ दिनों से देशभर में चर्चा का विषय बना हुआ है। महाराष्ट्र के पुणे जिले के पास स्थित लोहागढ़ किले पर हुई एक घटना, जिसे शुरुआत में सामान्य ट्रेकिंग हादसा माना गया था, अब हत्या की साजिश के रूप में जांच के दायरे में है। पुलिस की जांच में सामने आए तथ्यों ने इस मामले को राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में ला दिया है।
महाराष्ट्र के लोनावला के पास ऐतिहासिक लोहगड किले में एक मशहूर रियल एस्टेट बिजनेसमैन की मौत के मामले ने अब बेहद खौफनाक और चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। जिस घटना को शुरुआत में पैर फिसलने के कारण हुई एक दुखद दुर्घटना माना जा रहा था, वह असल में ठंडे दिमाग से रची गई एक खूनी साजिश निकली। इस पुणे मर्डर केस ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। पुणे ग्रामीण पुलिस द्वारा की गई गहन तकनीकी जांच में यह साफ हो गया है कि 26 वर्षीय बिजनेसमैन केतन अग्रवाल की मौत कोई इत्तेफाक नहीं थी, बल्कि उनकी ही होने वाली पत्नी (मंगेतर) और उसके प्रेमी द्वारा रची गई सुनियोजित हत्या थी। इस हाई-प्रोफाइल मामले में पुलिस ने दोनों मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और अदालत ने उन्हें सात दिनों की पुलिस कस्टडी में भेज दिया है। आइए, इस पूरे घटनाक्रम की परत-दर-परत और पुलिस को मिले सुरागों की पूरी कहानी को आसान शब्दों में समझते हैं।
क्या था पूरा मामला और कैसे हुई घटना?

पिंपरी-चिंचवड़ के रहने वाले 26 वर्षीय केतन अग्रवाल अपने पारिवारिक रियल एस्टेट कारोबार ‘सक्सेस ग्रुप’ के डायरेक्टर और मुख्य विपणन अधिकारी (CMO) थे। उन्होंने एंटरप्रेन्योरशिप में विदेश से एमएस (MS) की डिग्री हासिल की थी। इसी साल फरवरी में उनका विवाह 20 वर्षीय सिया गोयल से तय हुआ था, जिसने एक निजी कॉलेज से कॉमर्स की पढ़ाई की थी। दोनों की शादी इसी साल नवंबर महीने में उदयपुर के एक महल में बेहद भव्य तरीके से होने वाली थी, जिसके लिए परिवारों ने करोड़ों रुपये की बुकिंग भी कर ली थी।
18 जून, 2026 को सिया गोयल के जन्मदिन के मौके पर केतन और सिया दोनों लोनावला के पास स्थित ऐतिहासिक लोहगड किले पर ट्रैकिंग के लिए गए थे। सुबह करीब 10:30 बजे अचानक यह खबर आई कि केतन अग्रवाल का पैर फिसल गया और वह गहरी खाई में गिर गए। लगभग तीन घंटे के कड़े रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद केतन का शव गहरी दरी से बाहर निकाला गया। उस समय मंगेतर सिया गोयल ने पुलिस और केतन के परिवार को बताया कि केतन फोटो खींचते समय अचानक असंतुलित हो गए और यह एक हादसा था। पुलिस ने भी शुरुआत में इसे एक ‘एक्सीडेंटल डेथ‘ (आकस्मिक मृत्यु) के रूप में दर्ज किया था।
33 डिग्री तापमान में एक ‘हुडी’ ने बदला जांच का रुख
इस मामले में सबसे बड़ा मोड़ तब आया जब केतन की बहन संजना और उनके परिवार ने पुलिस के सामने कुछ गंभीर संदेह व्यक्त किए। परिवार का कहना था कि केतन ट्रैकिंग के शौकीन थे और उस इलाके के रास्तों से अच्छी तरह वाकिफ थे, उनका इस तरह गिरना मुमकिन नहीं लगता। इसके अलावा, परिवार ने बताया कि सिया पिछले कुछ दिनों से केतन पर लगातार लोहगड किले पर जाने का दबाव बना रही थी। वह इससे पहले 31 मई और फिर 4 जून को भी केतन को उसी किले पर ले गई थी।
पुणे ग्रामीण पुलिस के सीनियर अधिकारियों ने जब किले के टिकट काउंटर और आसपास लगे सीसीटीवी (CCTV) कैमरों की फुटेज को खंगालना शुरू किया, तो उन्हें एक बेहद अजीब सुराग मिला। पुलिस ने देखा कि केतन और सिया के ठीक पीछे कुछ ही मीटर की दूरी पर एक संदिग्ध युवक चल रहा था। उस समय जून की भीषण गर्मी थी और तापमान करीब 33 डिग्री सेल्सियस था। इसके बावजूद, उस युवक ने पूरे बदन को ढकने वाली एक मोटी ‘हुडी’ (Hoodie) पहन रखी थी और हुडी की टोपी को आगे की तरफ इतना झुकाया हुआ था कि उसका चेहरा दिखाई न दे। साथ ही उसने कानों पर बड़े हेडसेट लगा रखे थे। सीसीटीवी फुटेज में एक जगह यह भी दिखा कि जैसे ही सिया पीछे मुड़कर देखती है, वह हुडी वाला शख्स तुरंत नीचे बैठ जाता है। 33 डिग्री की गर्मी में हुडी पहनने की इसी अजीब बात ने पुलिस के शक को यकीन में बदल दिया।
2000 कॉल्स और एक गुप्त प्रेम संबंध का भंडाफोड़
सीसीटीवी में दिखे हुडी वाले संदिग्ध युवक की पहचान करने के लिए पुलिस ने तकनीकी विश्लेषण और सोशल मीडिया प्रोफाइल का सहारा लिया। जांच में सामने आया कि वह युवक 22 वर्षीय चेतन चौधरी था, जो पुणे के कोंढवा इलाके का रहने वाला था। जब पुलिस ने सिया गोयल के मोबाइल फोन के कॉल डिटेल्स रिकॉर्ड (CDR) निकलवाए, तो जांच अधिकारी भी सन्न रह गए।
पुणे ग्रामीण पुलिस के पुलिस अधीक्षक (SSP) संदीप सिंह गिल के अनुसार:
“सिया गोयल और चेतन चौधरी के बीच पिछले कई महीनों से लगातार बातचीत हो रही थी। दोनों के बीच 2,000 से अधिक फोन कॉल्स का रिकॉर्ड मिला, जिनमें से कई कॉल घंटों लंबी थीं। तकनीकी विश्लेषण से साफ हो गया कि दोनों के बीच गहरा संबंध था और वे केतन अग्रवाल को अपने रास्ते से हटाना चाहते थे।”
पूछताछ में यह भी सामने आया कि आरोपी चेतन चौधरी ने पकड़े जाने से बचने के लिए बेहद शातिर तरीका अपनाया था। वह 18 जून को अपने घर से निकलते समय अपना मोबाइल फोन कोंढवा स्थित अपने कमरे पर ही छोड़ आया था, ताकि उसकी लोकेशन लोहगड किले के पास ट्रेस न हो सके। लेकिन सीसीटीवी कैमरों और उसकी शारीरिक बनावट ने उसकी इस चालाकी को पूरी तरह नाकाम कर दिया।
हत्या का मकसद: क्यों चुना मौत का यह खौफनाक रास्ता?
लोनावला ग्रामीण पुलिस की कड़ी पूछताछ के सामने दोनों आरोपियों ने अपना गुनाह कबूल कर लिया है। पुलिस पूछताछ में जब आरोपी चेतन से पूछा गया कि अगर वे एक-दूसरे से प्यार करते थे, तो वे भाग क्यों नहीं गए? केतन की हत्या क्यों की?
इस पर पुलिस अधिकारियों ने बताया कि सिया गोयल इस शादी के खिलाफ थी क्योंकि वह चेतन से संबंध बनाए रखना चाहती थी। लेकिन वह सगाई तोड़कर चेतन के साथ भागना भी नहीं चाहती थी, क्योंकि उसे डर था कि ऐसा करने से समाज में उसके परिवार की भारी बदनामी होगी। इसलिए, उसने और चेतन ने मिलकर केतन को ही हमेशा के लिए रास्ते से हटाने का यह खौफनाक ‘मास्टर प्लान’ तैयार किया, ताकि दुनिया के सामने यह केवल एक ट्रैकिंग हादसा लगे और किसी को उन पर शक भी न हो।
कौन थे केतन अग्रवाल?
केतन अग्रवाल पुणे क्षेत्र की एक रियल एस्टेट कंपनी से जुड़े युवा कारोबारी थे। परिवार के अनुसार उनकी सगाई हो चुकी थी और आने वाले महीनों में विवाह की तैयारी चल रही थी। दोनों परिवारों ने शादी की तैयारियां भी शुरू कर दी थीं।
परिजनों का कहना है कि केतन अपने व्यवसाय और परिवार के प्रति जिम्मेदार थे तथा विवाह को लेकर भी उत्साहित थे। इसलिए उनकी अचानक हुई मौत ने परिवार को गहरा सदमा पहुंचाया।
परिवार को दुर्घटना की कहानी पर क्यों हुआ संदेह?
पुलिस अधिकारियों के अनुसार जांच के शुरुआती चरण में ही परिवार ने कुछ महत्वपूर्ण बिंदुओं की ओर ध्यान दिलाया। परिवार का कहना था कि केतन शारीरिक रूप से स्वस्थ थे और ट्रेकिंग का अनुभव भी रखते थे। इसलिए केवल फिसलकर इतनी बड़ी दुर्घटना होने की बात उन्हें सहज नहीं लगी।
इसी आधार पर पुलिस ने घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण किया, आसपास के सीसीटीवी कैमरों, मोबाइल लोकेशन, कॉल रिकॉर्ड और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच शुरू की। यही जांच आगे चलकर मामले का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा बनी।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?

पुणे ग्रामीण पुलिस के अनुसार जांच के दौरान कई डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्य मिले, जिनके आधार पर हत्या की साजिश की आशंका मजबूत हुई।
पुलिस का दावा है कि मोबाइल फोन रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, लोकेशन डेटा और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के विश्लेषण के बाद जांच की दिशा बदल गई।
जांच के दौरान पुलिस ने यह भी कहा कि कथित रूप से घटना से पहले कई बार लोहागढ़ क्षेत्र का दौरा किया गया था। इन तथ्यों की पुष्टि के लिए पुलिस ने विभिन्न तकनीकी साक्ष्य एकत्र किए हैं। हालांकि इन सभी दावों का अंतिम परीक्षण अदालत में होना बाकी है।
पुलिस ने किन लोगों को गिरफ्तार किया?
जांच के आधार पर पुलिस ने मृतक की मंगेतर और एक अन्य युवक को गिरफ्तार किया।
पुलिस का आरोप है कि दोनों के बीच पहले से संपर्क था और जांच के दौरान मिले साक्ष्यों के आधार पर हत्या की साजिश रचने की आशंका सामने आई। दोनों आरोपियों को अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें पुलिस हिरासत में भेजा गया ताकि आगे पूछताछ की जा सके।
यह उल्लेख करना आवश्यक है कि आरोपियों के खिलाफ आरोपों की अंतिम पुष्टि केवल न्यायालय में मुकदमे की सुनवाई के बाद ही होगी।
डिजिटल साक्ष्य कैसे बने जांच का आधार?

इस मामले में पुलिस ने पारंपरिक जांच के साथ-साथ डिजिटल फॉरेंसिक पर भी विशेष ध्यान दिया।
जांच एजेंसियों के अनुसार मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन डेटा, सीसीटीवी फुटेज, इंटरनेट गतिविधियां और अन्य इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच की गई। पुलिस का कहना है कि इन्हीं तथ्यों के आधार पर घटना को दुर्घटना की बजाय संभावित हत्या के रूप में देखा जाने लगा।
अदालत में क्या हुआ?

गिरफ्तारी के बाद दोनों आरोपियों को स्थानीय अदालत में पेश किया गया।
पुलिस ने अदालत से कहा कि मामले की जांच अभी प्रारंभिक चरण में है और डिजिटल साक्ष्यों सहित कई पहलुओं की जांच बाकी है। अदालत ने जांच की आवश्यकता को देखते हुए आरोपियों को पुलिस हिरासत में भेजने का आदेश दिया।
मुख्यमंत्री ने लिया संज्ञान
मामले ने राज्यभर में चर्चा के बाद महाराष्ट्र सरकार का भी ध्यान आकर्षित किया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और अधिकारियों को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए। साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने की घोषणा की गई। सरकार का कहना है कि उद्देश्य मामले की निष्पक्ष और त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करना है।
जांच अभी जारी है
पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच अभी पूरी नहीं हुई है। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों, फॉरेंसिक रिपोर्ट और गवाहों के बयान सहित कई पहलुओं की जांच जारी है।
कानून के अनुसार आरोपपत्र दाखिल होने, अदालत में साक्ष्यों की जांच और मुकदमे की सुनवाई के बाद ही किसी आरोपी की दोषसिद्धि या दोषमुक्ति का अंतिम निर्णय होगा।
इसलिए मामले से जुड़े किसी भी दावे को अंतिम सत्य नहीं माना जा सकता जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।
पुलिस जांच की दिशा कैसे बदली, डिजिटल साक्ष्यों और फॉरेंसिक जांच में क्या सामने आया?
जांच का दायरा कैसे बढ़ा?
केतन अग्रवाल की मौत के बाद शुरुआती जांच दुर्घटना के एंगल से शुरू हुई थी। लेकिन परिवार की शिकायत और घटनास्थल से मिले कुछ शुरुआती संकेतों के बाद पुणे ग्रामीण पुलिस ने मामले की जांच का दायरा बढ़ाया। इसके बाद तकनीकी साक्ष्यों, प्रत्यक्षदर्शियों के बयान और घटनास्थल की दोबारा जांच की गई।
जांच अधिकारियों के अनुसार किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले सभी संभावित पहलुओं की जांच की गई। पुलिस का कहना है कि इसी प्रक्रिया के दौरान कुछ ऐसे तथ्य सामने आए जिनके आधार पर हत्या की आशंका को लेकर प्राथमिकी में संबंधित धाराएं जोड़ी गईं।
डिजिटल फॉरेंसिक जांच क्यों बनी सबसे महत्वपूर्ण कड़ी?
इस मामले में डिजिटल फॉरेंसिक जांच को सबसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस ने आरोपियों और मृतक के मोबाइल फोन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), लोकेशन डेटा, इंटरनेट गतिविधियों तथा अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड की जांच की।
पुलिस के अनुसार इन डिजिटल रिकॉर्ड की सहायता से घटना से पहले और घटना के दिन की गतिविधियों का क्रम तैयार किया गया। अधिकारियों का कहना है कि इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों का विश्लेषण जांच की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण रहा।
हालांकि इन साक्ष्यों की अंतिम स्वीकार्यता और विश्वसनीयता का परीक्षण न्यायालय में सुनवाई के दौरान होगा।
घटनास्थल का दोबारा निरीक्षण
जांच टीम ने लोहागढ़ किले के उस स्थान का कई बार निरीक्षण किया जहां से केतन अग्रवाल के गिरने की बात सामने आई थी।
पुलिस ने स्थल का मापन, रास्तों का निरीक्षण, सुरक्षा व्यवस्था, मोबाइल नेटवर्क की उपलब्धता तथा संभावित घटनाक्रम का पुनर्निर्माण (Scene Reconstruction) किया। जांच में फॉरेंसिक विशेषज्ञों की भी सहायता ली गई।
पुलिस का कहना है कि घटनास्थल से मिले भौतिक और तकनीकी साक्ष्यों का मिलान अन्य रिकॉर्ड के साथ किया गया।
फॉरेंसिक रिपोर्ट की भूमिका
मामले में पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य फॉरेंसिक जांच भी महत्वपूर्ण साक्ष्य मानी जा रही हैं।
जांच एजेंसियों के अनुसार मृत्यु के कारण, शरीर पर मौजूद चोटों, घटनास्थल की परिस्थितियों और उपलब्ध भौतिक साक्ष्यों का वैज्ञानिक परीक्षण कराया गया है।
पुलिस ने अभी तक पूरी फॉरेंसिक रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की है। इसलिए रिपोर्ट के अंतिम निष्कर्ष अदालत में प्रस्तुत किए जाने के बाद ही स्पष्ट होंगे।
पुलिस का दावा और आरोपियों का पक्ष
पुलिस का कहना है कि जांच के दौरान मिले डिजिटल और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई।
दूसरी ओर, आरोपियों की ओर से अदालत में अपना पक्ष रखने का अधिकार सुरक्षित है। भारतीय न्याय प्रणाली के अनुसार प्रत्येक आरोपी तब तक निर्दोष माना जाता है जब तक अदालत उसे दोषी घोषित न कर दे।
इसी कारण जांच एजेंसियों के दावों और अदालत के अंतिम निर्णय के बीच स्पष्ट अंतर बनाए रखना आवश्यक है।
पुलिस हिरासत में पूछताछ
अदालत से पुलिस हिरासत मिलने के बाद जांच अधिकारियों ने आरोपियों से विस्तृत पूछताछ की।
पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान घटनाक्रम, यात्रा की योजना, मोबाइल संचार, वित्तीय लेनदेन और अन्य संबंधित पहलुओं पर जानकारी जुटाई गई।
जांच एजेंसियों ने यह भी बताया कि यदि नए तथ्य सामने आते हैं तो जांच का दायरा और बढ़ाया जा सकता है।
क्या अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच हो रही है?
पुलिस ने आधिकारिक रूप से कहा है कि जांच अभी जारी है और यदि किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
हालांकि फिलहाल किसी अतिरिक्त व्यक्ति के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष घोषित नहीं किया गया है। पुलिस का कहना है कि हर पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है।
परिवार की मांग क्या है?
केतन अग्रवाल के परिवार ने शुरुआत से ही निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।
परिजनों का कहना है कि उन्हें न्यायपालिका और जांच एजेंसियों पर भरोसा है। परिवार ने सरकार से भी मामले की त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करने की अपील की।
महाराष्ट्र सरकार की कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने भी हस्तक्षेप किया।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने पीड़ित परिवार से मुलाकात के बाद अधिकारियों को निर्देश दिया कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में कराई जाए।
इसके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता उज्ज्वल निकम को विशेष लोक अभियोजक नियुक्त करने का निर्णय लिया गया ताकि सरकार की ओर से प्रभावी पैरवी की जा सके।
सरकार ने कहा कि जांच और अभियोजन दोनों निष्पक्ष तथा कानून के अनुसार संचालित होंगे।
पुलिस ने जनता से क्या अपील की?
जांच अधिकारियों ने लोगों से अपील की है कि मामले से जुड़ी अपुष्ट जानकारी, सोशल मीडिया पोस्ट या अफवाहों पर विश्वास न करें।
पुलिस का कहना है कि केवल आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति, अदालत के रिकॉर्ड और जांच एजेंसी द्वारा जारी जानकारी को ही प्रमाणिक माना जाए।
आगे क्या होगा?

अब इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण चरण आरोपपत्र (Chargesheet) दाखिल होने का होगा। जांच पूरी होने के बाद पुलिस अदालत में विस्तृत आरोपपत्र पेश करेगी।
इसके बाद अदालत उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों के बयान, फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल रिकॉर्ड और दोनों पक्षों की दलीलों के आधार पर सुनवाई करेगी।
जब तक न्यायिक प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती, तब तक किसी भी आरोपी की दोषसिद्धि या दोषमुक्ति पर अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
इसी कारण यह मामला अभी भी एक विचाराधीन आपराधिक मामला है और इससे जुड़े सभी दावों का अंतिम परीक्षण न्यायालय में होना शेष है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: पुणे मर्डर केस की मुख्य घटना कब और कहां हुई थी?
उत्तर: यह घटना 18 जून, 2026 को सुबह करीब 10:30 बजे पुणे जिले के लोनावला के पास स्थित ऐतिहासिक लोहगड किले (Lohagad Fort) में हुई थी, जहां बिजनेसमैन केतन अग्रवाल को खाई में धकेल दिया गया था।
प्रश्न 2: पुलिस को इस मामले में हत्या का शक कैसे हुआ?
उत्तर: शुरुआत में इसे पैर फिसलने की दुर्घटना माना गया था। लेकिन केतन के परिवार के संदेह जताने के बाद जब पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज देखी, तो उन्हें 33 डिग्री की गर्मी में हुडी पहने एक संदिग्ध युवक (चेतन चौधरी) केतन का पीछा करता दिखा। इसके बाद कॉल रिकॉर्ड्स से पूरी साजिश का पर्दाफाश हुआ।
प्रश्न 3: इस मामले में कौन-कौन आरोपी हैं और उनकी वर्तमान स्थिति क्या है?
उत्तर: इस मामले में मृतक केतन अग्रवाल की मंगेतर सिया गोयल (20 वर्ष) और उसका प्रेमी चेतन चौधरी (22 वर्ष) मुख्य आरोपी हैं। लोनावला ग्रामीण पुलिस ने दोनों को भारतीय न्याय संहिता (BNS) के तहत हत्या और आपराधिक साजिश की धाराओं में गिरफ्तार कर लिया है। पुणे की अदालत ने दोनों को 29 जून, 2026 तक के लिए पुलिस हिरासत (Police Custody) में भेजा है।
प्रश्न 4: मृतक केतन अग्रवाल कौन थे?
उत्तर: 26 वर्षीय केतन अग्रवाल पिंपरी-चिंचवड़ के एक बड़े निर्माण और रियल एस्टेट व्यवसायी विशाल अग्रवाल के बेटे थे। वे अपने पारिवारिक बिजनेस ‘सक्सेस ग्रुप’ में डायरेक्टर और चीफ मार्केटिंग अधिकारी के पद पर कार्यरत थे।
