अयोध्या – Ayodhya Ram Temple Funds Probe यानी अयोध्या के भव्य राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और उपहारों के प्रबंधन को लेकर चल रही जांच अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गई है। मंदिर में पैसे के कथित गबन और सोने-चांदी के आभूषणों के रिकॉर्ड में मिली गंभीर विसंगतियों के बाद, उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने एक बहुत बड़ा कदम उठाया है। तीन सदस्यों वाली इस हाई-प्रोफाइल एसआईटी ने श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों और मंदिर से जुड़े महत्वपूर्ण सेवादारों को बिना अनुमति अयोध्या से बाहर न जाने (शहर छोड़ने पर रोक) का सख्त निर्देश जारी किया है। यह कड़ा निर्देश तब सामने आया जब जांच दल ने छह दिनों तक अयोध्या में डेरा डालकर जमीनी स्तर पर दस्तावेजों, तिजोरियों, सीसीटीवी फुटेज और दान पेटियों के रिकॉर्ड खंगाले। शुरुआती जांच में सामने आया है कि श्रद्धालुओं द्वारा रामलला को अर्पित किए गए सोने-चांदी के आभूषणों, हीरों और कीमती पत्थरों के आधिकारिक कागजात और वास्तविक स्टॉक में बहुत बड़ा अंतर है, जिसे लेकर ट्रस्ट के जिम्मेदार अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे पा रहे हैं।
यह पूरा मामला तब गरमाया जब विपक्षी दलों ने सोशल मीडिया और मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर राम मंदिर के दान में करोड़ों रुपये की हेराफेरी के आरोप लगाए। इसके बाद खुद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की लिखित सिफारिश पर उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 13 जून 2026 को इस उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) का गठन किया था। इस जांच दल की कमान लखनऊ के मंडलायुक्त (Divisional Commissioner) विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (IG) किरण एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन के हाथों में है। छह दिनों की सघन पूछताछ और जांच प्रक्रिया को पूरा कर रविवार, 21 जून को लखनऊ लौटने से ठीक पहले एसआईटी ने ट्रस्ट के अधिकारियों के लिए यह ‘नो-लीव’ (शहर न छोड़ने) का फरमान जारी किया। जांच एजेंसी इस बात को लेकर बेहद सतर्क है कि जांच के इस महत्वपूर्ण पड़ाव पर कोई भी संदिग्ध या मुख्य गवाह शहर से बाहर न जाए, क्योंकि इस मामले की दैनिक प्रगति रिपोर्ट (Daily Status Report) सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भेजी जा रही है और आने वाले दिनों में कुछ बड़े चेहरों पर कानूनी गाज गिरना तय माना जा रहा है।
कैसे शुरू हुई जांच?
राम मंदिर से जुड़े दान और चढ़ावे को लेकर पिछले कुछ समय से सवाल उठ रहे थे। विभिन्न शिकायतों और आरोपों के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं भी जांच की मांग की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय SIT का गठन किया।
SIT में प्रशासन, पुलिस और वित्त विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया गया। जांच टीम को प्रारंभिक रिपोर्ट निर्धारित समय में और अंतिम रिपोर्ट बाद में राज्य सरकार को सौंपने का दायित्व दिया गया।
60 किलो चांदी गायब होने के दावों से मचा हड़कंप
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब नेशनल ज्वेलर्स एसोसिएशन द्वारा रामलला के चरणों में अर्पित की गई करीब 60 किलोग्राम चांदी की सिल्लियों (Silver Bars) का रिकॉर्ड बुक से गायब होने की बात सामने आई। यह चांदी देश भर के स्वर्ण और चांदी व्यापारियों के सहयोग से विशेष रूप से तैयार कराई गई थी और इसे मंदिर प्रबंधन को सौंपा गया था। ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुराग रस्तोगी के मुताबिक, संस्था के पास ट्रस्ट को चांदी सौंपने की बकायदा आधिकारिक और वैध रसीद मौजूद है, लेकिन जब एसआईटी ने मंदिर के आंतरिक इन्वेंट्री और स्टोर रूम के रजिस्टरों की जांच की, तो इस 60 किलो चांदी का कहीं कोई जिक्र या इंद्राज नहीं मिला। मंदिर के आभूषणों और बहुमूल्य उपहारों के मुख्य कस्टोडियन (रक्षक) कृष्ण देव तिवारी और चार मुख्य पुजारियों से जब इस संबंध में लंबी पूछताछ की गई, तो उन्होंने भी इस बड़ी खेप की वर्तमान स्थिति या स्थान के बारे में अनभिज्ञता जाहिर की।
जांच के दायरे में क्या-क्या?
जांच केवल नकद दान तक सीमित नहीं है। SIT उन सभी प्रक्रियाओं की जांच कर रही है जिनके माध्यम से श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए चढ़ावे मंदिर प्रशासन तक पहुंचते हैं।
जांच के दौरान निम्न बिंदुओं पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है:
मंदिर के दानपात्रों में प्राप्त नकद राशि, सोने-चांदी के आभूषण, बहुमूल्य पत्थर, हीरे-जवाहरात और अन्य मूल्यवान वस्तुओं के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसके अलावा प्राप्त वस्तुओं का स्टॉक रजिस्टर, इन्वेंट्री रिकॉर्ड, बैंकिंग रिकॉर्ड, ऑडिट दस्तावेज और डिजिटल एंट्री का मिलान भी किया जा रहा है।
रिपोर्टों के अनुसार जांचकर्ताओं को कुछ ऐसे मामले मिले हैं जहां बहुमूल्य चढ़ावे से जुड़े रिकॉर्ड और वास्तविक एंट्री में अंतर पाया गया है। हालांकि अभी तक SIT ने सार्वजनिक रूप से किसी अंतिम निष्कर्ष की घोषणा नहीं की है।
महाकुंभ 2025 की अवधि और दान पेटियों का गणित

एसआईटी के रडार पर मुख्य रूप से जनवरी और फरवरी 2025 की अवधि है, जब प्रयागराज महाकुंभ के दौरान अयोध्या में श्रद्धालुओं का एक अभूतपूर्व रेला उमड़ा था। जांच सूत्रों के हवाले से मिली रिपोर्ट के अनुसार, उस दौरान रोजाना करीब 10 लाख श्रद्धालु रामलला के दर्शन के लिए पहुंच रहे थे। मंदिर परिसर में रखी दान पेटियां (Donation Boxes) महज कुछ ही घंटों के भीतर नकदी, सोने के सिक्कों और चांदी के सामानों से पूरी तरह भर जाती थीं। एसआईटी को संदेह है कि इसी अत्यधिक भीड़ और भारी चढ़ावे के दौर में नोटों की गिनती और आभूषणों को सुरक्षित रखने की प्रक्रियाओं में भारी ढिलाई बरती गई या फिर जानबूझकर मॉनिटरिंग सिस्टम को कमजोर किया गया। इसी का फायदा उठाकर दान के एक बड़े हिस्से को मुख्य रिकॉर्ड में दर्ज करने से पहले ही गायब कर दिया गया।
सोना-चांदी और बहुमूल्य चढ़ावे क्यों बने जांच का केंद्र?
राम मंदिर में प्रतिदिन हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। इनमें से बड़ी संख्या में लोग नकद दान के अलावा सोना, चांदी और अन्य मूल्यवान वस्तुएं भी चढ़ाते हैं।
जांच एजेंसियां यह सत्यापित कर रही हैं कि इन चढ़ावों का रिकॉर्ड किस प्रकार रखा गया, उन्हें सुरक्षित रखने की प्रक्रिया क्या थी और बाद में उनकी लेखा प्रविष्टियां किस प्रकार की गईं। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया है कि सोना और चांदी से संबंधित एंट्री तथा भौतिक रिकॉर्ड के बीच अंतर की जांच की जा रही है।
सीसीटीवी डेटा डिलीट होने से बढ़ी मुश्किलें
जांच के रास्ते में एक बड़ी तकनीकी बाधा सीसीटीवी फुटेज (CCTV Footage) को लेकर आ रही है। नियमानुसार सुरक्षा और पारदर्शिता के लिए हर कोने पर कैमरे सक्रिय हैं, लेकिन मंदिर के डिजिटल स्टोरेज सिस्टम में केवल पिछले 45 दिनों का ही बैकअप सुरक्षित रहता है, जिसके बाद पुराना डेटा अपने आप डिलीट (Auto-Overwrite) हो जाता है। एसआईटी को अंदेशा है कि कुछ महत्वपूर्ण तारीखों के फुटेज के साथ जानबूझकर छेड़छाड़ की गई हो सकती है या उन्हें समय से पहले साफ किया गया है। इसके समाधान के लिए जांच दल ने अब यूपी पुलिस के साइबर और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की मदद ली है ताकि हार्ड ड्राइव और सर्वर्स से डिलीट हो चुके डेटा और लॉग्स को रिकवर किया जा सके और यह देखा जा सके कि दान पेटियां खोलने और नोटों की गिनती के समय कौन-कौन लोग वहां मौजूद थे।
जमीन खरीद और निर्माण सामग्री की खरीद भी जांच के घेरे में
प्रशासनिक सूत्रों के अनुसार, Ayodhya Ram Temple Funds Probe का दायरा अब केवल श्रद्धालुओं के सोने-चांदी या कैश तक ही सीमित नहीं रह गया है। एसआईटी ने अपनी जांच की परिधि को बढ़ाते हुए ट्रस्ट द्वारा अलग-अलग चरणों में खरीदी गई जमीनों (Land Deals) और मंदिर निर्माण के लिए मंगाए गए पत्थरों व अन्य निर्माण सामग्रियों की खरीद के बिलों को भी अपने कब्जे में ले लिया है। समाजवादी पार्टी और आम आदमी पार्टी जैसी राजनीतिक पार्टियों ने पूर्व में आरोप लगाए थे कि ट्रस्ट ने कुछ जमीनों को बाजार भाव से कई गुना अधिक कीमतों पर खरीदा, जिससे सीधे तौर पर दान के पैसे का दुरुपयोग हुआ। एसआईटी इन सभी वित्तीय लेन-देन के कागजातों की स्क्रूटनी कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इसमें किसी बिचौलिए या अधिकारी को अनुचित वित्तीय लाभ पहुंचाया गया है।
ट्रस्ट अधिकारियों को अयोध्या छोड़ने से क्यों रोका गया?
SIT द्वारा ट्रस्ट पदाधिकारियों और मंदिर प्रशासन से जुड़े कुछ लोगों को अयोध्या में ही रहने का निर्देश दिया गया है। इसका उद्देश्य जांच के दौरान आवश्यक पूछताछ और दस्तावेजी सत्यापन सुनिश्चित करना बताया जा रहा है।
जांच अधिकारियों का मानना है कि जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, कुछ व्यक्तियों से बार-बार पूछताछ की आवश्यकता पड़ सकती है। इसलिए जांच पूरी होने तक उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना जरूरी है।
किन-किन लोगों से पूछताछ हुई?
SIT ने मंदिर प्रबंधन से जुड़े कर्मचारियों, दान प्रबंधन प्रक्रिया में शामिल व्यक्तियों, बैंकिंग प्रक्रिया से जुड़े लोगों और कुछ ट्रस्ट अधिकारियों से पूछताछ की है। जांच टीम ने दान प्राप्त करने, गिनती करने और बैंक खातों में जमा करने की प्रक्रिया का भी अध्ययन किया है।
कुछ रिपोर्टों के अनुसार 40 से अधिक लोगों से पूछताछ की जा चुकी है। हालांकि आधिकारिक तौर पर पूछताछ की कुल संख्या सार्वजनिक नहीं की गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज
जांच शुरू होने के बाद राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं भी सामने आई हैं। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है। कुछ नेताओं ने न्यायिक जांच की मांग भी उठाई है।
दूसरी ओर राज्य सरकार का कहना है कि SIT स्वतंत्र रूप से अपना काम कर रही है और रिपोर्ट आने के बाद आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
क्या किसी पर आरोप तय हुए हैं?
अब तक उपलब्ध आधिकारिक जानकारी के अनुसार जांच जारी है और किसी भी व्यक्ति को दोषी घोषित नहीं किया गया है। SIT अभी साक्ष्य एकत्र कर रही है और विभिन्न दस्तावेजों का मिलान कर रही है।
इसलिए जांच पूरी होने से पहले किसी भी व्यक्ति या संस्था के खिलाफ अंतिम निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा।
मामले से जुड़े आधिकारिक बयान और राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
“श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ही मांग पर राज्य सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया है। इस जांच का एकमात्र उद्देश्य दूध का दूध और पानी का पानी करना है। जो भी सच होगा, वह पूरी पारदर्शिता के साथ जनता के सामने आएगा और यदि कोई दोषी पाया जाता है, तो उसके खिलाफ कानून के तहत बेहद सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
— योगी आदित्यनाथ, मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश
“भगवान राम के नाम पर देश और दुनिया के करोड़ों हिंदुओं ने अपनी गाढ़ी कमाई का पैसा पूरी आस्था के साथ दान किया था। अगर उस पवित्र दान के पैसे और सोने-चांदी में भी भ्रष्टाचार और गबन की बू आ रही है, तो यह देश की आस्था पर बहुत बड़ा आघात है। इस पूरे घोटाले की माननीय उच्च न्यायालय की निगरानी में निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।”
— अखिलेश यादव, अध्यक्ष, समाजवादी पार्टी (ट्वीट के जरिए)
आगे क्या होगा?
जांच दल अपनी रिपोर्ट तैयार कर रहा है। रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंपी जाएगी जिसके बाद आगे की कार्रवाई तय होगी। यदि जांच में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या आपराधिक कृत्य के प्रमाण मिलते हैं तो संबंधित कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
फिलहाल पूरा ध्यान रिकॉर्ड सत्यापन, पूछताछ और दस्तावेजी जांच पर केंद्रित है। देशभर के श्रद्धालु और आम नागरिक इस जांच के निष्कर्ष का इंतजार कर रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: Ayodhya Ram Temple Funds Probe के लिए एसआईटी (SIT) का गठन क्यों किया गया?
उत्तर: राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए करोड़ों रुपये के कैश दान, जमीनों की खरीद और विशेष रूप से सोने-चांदी के आभूषणों के स्टॉक और कागजी दस्तावेजों में भारी गड़बड़ी व विसंगतियां पाए जाने के आरोपों के बाद इस एसआईटी का गठन किया गया था। स्वयं ट्रस्ट की गुजारिश पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने यह कदम उठाया।
प्रश्न 2: इस जांच दल (SIT) में कौन-कौन से वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं?
उत्तर: इस उच्च स्तरीय तीन सदस्यीय विशेष जांच दल की अध्यक्षता लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत कर रहे हैं। उनके साथ आईजी (IG) किरण एस. और उत्तर प्रदेश शासन के वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन इस पूरी वित्तीय और आपराधिक जांच को संभाल रहे हैं।
प्रश्न 3: ट्रस्ट के पदाधिकारियों और सेवादारों पर क्या पाबंदी लगाई गई है?
उत्तर: एसआईटी ने जांच को प्रभावित होने से बचाने और महत्वपूर्ण गवाहों की मौजूदगी सुनिश्चित करने के लिए राम मंदिर ट्रस्ट के प्रमुख पदाधिकारियों, खाताधारकों और उपहार गृह के प्रभारियों को बिना पूर्व सूचना या अनुमति के अयोध्या शहर से बाहर जाने (Leave Restrict) पर पूरी तरह रोक लगा दी है।
प्रश्न 4: 60 किलो चांदी के गायब होने का क्या विवाद है?
उत्तर: नेशनल ज्वेलर्स एसोसिएशन ने रामलला के मंदिर के लिए 60 किलोग्राम चांदी की सिल्लियां दान की थीं, जिसकी रसीद उनके पास है। लेकिन एसआईटी की शुरुआती जांच में मंदिर के आंतरिक स्टॉक रजिस्टर में इस चांदी की मौजूदगी या इसके उपयोग का कोई आधिकारिक ब्योरा नहीं मिला है, जिससे इसके गबन की आशंका गहरा गई है।
प्रश्न 5: क्या इस जांच की रिपोर्ट सार्वजनिक की जाएगी?
उत्तर: नए आईटी नियमों और प्रशासनिक पारदर्शिता के तहत एसआईटी रोजाना अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट को डिजिटल रूप में सुरक्षित कर मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) को भेज रही है। जांच पूरी होने के बाद इसकी अंतिम विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी जाएगी, जिसके आधार पर आगे की कानूनी या दंडात्मक कार्रवाई तय होगी।
