नई दिल्ली / तिरुवनंतपुरम – V.D. Satheesan: केरल की राजनीति में एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला हो गया है। दस दिनों की लंबी राजनीतिक उठापटक और इंतजार के बाद आज कांग्रेस हाईकमान ने वरिष्ठ नेता वी.डी. सतीशन (V.D. Satheesan) को केरल का नया मुख्यमंत्री घोषित कर दिया। 9 अप्रैल को हुए विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आए थे और कांग्रेस नीत यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) को जबरदस्त जीत मिली थी। लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर पार्टी के अंदर की खींचतान ने फैसले को दस दिनों तक रोके रखा। आज नई दिल्ली में AICC मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये यह एलान किया गया। सतीशन 18 मई 2026 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे।
दूसरी तरफ, वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) ने भी उसी दिन एक बड़ा फैसला लिया। केरल के दस साल तक मुख्यमंत्री रहे पिनराई विजयन को 16वीं केरल विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना गया। यानी जो सतीशन पहले विपक्ष के नेता थे, वो अब सरकार चलाएंगे – और जो पिनराई सरकार में थे, वो अब विपक्ष में बैठेंगे। केरल की राजनीति में ऐसी अदला-बदली कम ही देखने को मिलती है।
दस दिन की सियासी खींचतान का अंत
4 मई को नतीजे आने के बाद से ही केरल में मुख्यमंत्री की कुर्सी को लेकर जबरदस्त मारामारी शुरू हो गई थी। कांग्रेस के तीन बड़े नाम – वी.डी. सतीशन, AICC के महासचिव के.सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ नेता रमेश चेन्नीथला – इस रेस में सबसे आगे थे। पार्टी के अंदर हर गुट का अपना दावेदार था। वेणुगोपाल के साथ कुछ विधायक थे, तो सतीशन के साथ गठबंधन के साथी और जमीनी कार्यकर्ता। चेन्नीथला भी अपने समर्थकों के साथ दौड़ में बने रहे।
रिपोर्ट्स के मुताबिक राहुल गांधी ने केरल के कई नेताओं और पूर्व प्रदेश अध्यक्षों से अलग-अलग बात की। AICC के केरल प्रभारी दीपा दासमुंशी, केंद्रीय पर्यवेक्षक अजय माकन और मुकुल वासनिक ने लंबे दौर की चर्चाएं कीं। सतीशन ने खुद पर्यवेक्षकों को साफ कह दिया था कि वे किसी “कॉम्प्रोमाइज फॉर्मूले” को नहीं मानेंगे। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML), केरल कांग्रेस और रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी जैसे UDF के साथी दलों ने भी सतीशन का समर्थन किया था।
आखिरकार आज दोपहर नई दिल्ली में यह एलान हो गया। AICC के केरल प्रभारी दीपा दासमुंशी और पर्यवेक्षक अजय माकन व मुकुल वासनिक ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में यह जानकारी दी।
राज्यपाल से मिले सतीशन, सरकार बनाने का पेश किया दावा
मुख्यमंत्री के रूप में नाम की घोषणा के बाद वी.डी. सतीशन ने केरल के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात की और सरकार बनाने का दावा पेश किया। पार्टी सूत्रों के अनुसार शपथ ग्रहण समारोह 18 मई 2026 को होगा। केरल विधानसभा का वर्तमान कार्यकाल 23 मई 2026 को समाप्त हो रहा है, इसलिए नई सरकार का शपथ लेना जरूरी था।
कांग्रेस नेताओं ने किया स्वागत
जैसे ही सतीशन के नाम की घोषणा हुई, कांग्रेस के तमाम नेताओं ने इसका स्वागत किया।
AICC के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल ने कहा: “अंतिम फैसला आ गया है और कांग्रेस हाईकमान ने वी.डी. सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री चुना है। मैं इस फैसले का पूरे दिल से स्वागत करता हूँ। मुझे यकीन है कि सतीशन की सरकार केरल के लोगों की आकांक्षाओं और हमारे वादों को पूरा करेगी। हम पूरी तरह इस सरकार के साथ हैं।”
केरल प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सनी जोसेफ ने कहा: “यह बहुत अच्छा फैसला है।”
AICC के केरल पर्यवेक्षक अजय माकन ने बताया कि सभी से बात करके और विस्तृत चर्चा के बाद यह फैसला लिया गया है।
कौन हैं वी.डी. सतीशन? जानें उनका पूरा राजनीतिक सफर
वाडासेरी दामोदरन सतीशन यानी वी.डी. सतीशन का जन्म 31 मई 1964 को कोच्चि के पास नेट्टूर में एक नायर परिवार में हुआ था। उनकी प्रारंभिक शिक्षा पनंगड़ हाई स्कूल में हुई। उन्होंने एर्नाकुलम के थेवरा स्थित सेक्रेड हार्ट कॉलेज से स्नातक और राजगिरी कॉलेज ऑफ सोशल साइंसेज से सोशल वर्क में मास्टर डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने तिरुवनंतपुरम के केरल लॉ एकेडमी से LLB और गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से LLM की पढ़ाई की। लगभग दस साल तक उन्होंने केरल हाई कोर्ट में वकालत की।
सतीशन की राजनीतिक शुरुआत छात्र आंदोलन से हुई। वे केरल स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) – कांग्रेस का छात्र संगठन – से जुड़े। 1986-87 में वे महात्मा गांधी यूनिवर्सिटी यूनियन के अध्यक्ष बने। वे NSUI (नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया) के सचिव भी रहे। कॉलेज के दिनों में वे एक बेहतरीन वक्ता और वाद-विवाद प्रतियोगी के रूप में जाने जाते थे।
विधानसभा राजनीति में उनका पहला कदम 1996 में था जब उन्होंने एर्नाकुलम जिले के पारावूर निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव लड़ा, लेकिन CPI के उम्मीदवार पी. राजू से 1,116 वोटों से हार गए। पारावूर तब एक वामपंथी गढ़ माना जाता था। लेकिन सतीशन ने हिम्मत नहीं हारी और वहीं डटे रहे। 2001 में उन्होंने उसी सीट से दोबारा चुनाव लड़ा और जीत गए। तब से लेकर अब तक – 2001, 2006, 2011, 2016, 2021 और 2026 – वे लगातार छह बार पारावूर से विधायक चुने जाते रहे हैं। 2026 में उन्होंने CPI के ई.टी. टेसन मास्टर को 20,600 वोटों के बड़े अंतर से हराया।
विधानसभा में उन्होंने खुद को एक तेज और तथ्यों पर पकड़ रखने वाले नेता के रूप में स्थापित किया। वे कांग्रेस विधायक दल के मुख्य सचेतक (Chief Whip) भी रहे। उन्होंने केरल विधानसभा की पब्लिक अकाउंट्स कमेटी और एस्टीमेट्स कमेटी की अध्यक्षता की। वे AICC के तमिलनाडु प्रभारी सचिव और KPCC के उपाध्यक्ष भी रहे।
2021 में जब UDF को लगातार दूसरी बार हार का मुंह देखना पड़ा, तब कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने सतीशन को केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष नियुक्त किया। इस नियुक्ति से पार्टी के भीतर कुछ नाराजगी जरूर थी, लेकिन सतीशन ने विपक्ष के नेता के तौर पर पिनराई विजयन की सरकार पर जमकर हमले किए – भ्रष्टाचार, कानून-व्यवस्था और शासन जैसे मुद्दों पर।
विदेशों में रहने वाले मलयाली संगठनों ने उन्हें “बेस्ट पार्लियामेंटेरियन” का खिताब दिया। वे अपनी पत्नी आर. लक्ष्मी प्रिया और बेटी उन्नीमाया के साथ रहते हैं।
UDF की ऐतिहासिक जीत: एक दशक के वाम शासन का अंत

9 अप्रैल 2026 को हुए केरल विधानसभा चुनाव के नतीजे 4 मई को आए। 140 सदस्यीय विधानसभा में कांग्रेस नीत UDF ने 102 सीटें जीतीं, जो 1977 के बाद से गठबंधन का सबसे बड़ा जनादेश माना जा रहा है। INC ने अकेले 63 सीटें जीतीं, जबकि IUML ने 22 सीटें हासिल कीं। CPI(M) सिमट कर 26 सीटों पर आ गई। LDF पूरे तौर पर सिर्फ 35 सीटों पर रुक गया।
इस चुनाव में LDF के लिए सबसे बड़ा झटका यह रहा कि 21 सदस्यीय मंत्रिमंडल में से 13 मंत्री अपनी सीटें हार गए। सीएम पिनराई विजयन अपनी परंपरागत धर्मादाम सीट से जीते जरूर, लेकिन उनके जीत का मार्जिन काफी सिकुड़ गया। नतीजों के बाद पिनराई विजयन ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा दे दिया। यह पहली बार हुआ कि करीब पचास साल में भारत के किसी भी राज्य में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार नहीं रही।
भूमिका का उलटफेर: सतीशन सीएम, पिनराई विपक्ष में
इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम में सबसे दिलचस्प बात यह है कि 15वीं केरल विधानसभा में जहां सतीशन विपक्ष के नेता और पिनराई मुख्यमंत्री थे, 16वीं विधानसभा में दोनों की भूमिकाएं पूरी तरह बदल गई हैं।
CPI(M) की राज्य समिति ने सर्वसम्मति से पिनराई विजयन को पार्टी के विधायक दल का नेता और विपक्ष का नेता चुना। CPI(M) के राज्य सचिव एम.वी. गोविंदन ने यह घोषणा की। पिनराई अब 35 विधायकों की विपक्षी पार्टी बेंच का नेतृत्व करेंगे, जबकि सरकारी पक्ष में 102 सदस्य होंगे।
पिनराई विजयन 2016 से 2026 तक लगातार दस साल केरल के मुख्यमंत्री रहे – राज्य के इतिहास में सबसे लंबे समय तक सीएम रहने वाले नेता। अब वे पहली बार विपक्ष के नेता की भूमिका में आएंगे। हालांकि CPI ने पिनराई की इस नियुक्ति पर खुले तौर पर आपत्ति जताई थी, लेकिन CPI(M) ने उनके अनुभव और कद को देखते हुए यही फैसला लिया।
लंबे इंतजार के बाद मिली मंजिल: सतीशन की संघर्ष कहानी
वी.डी. सतीशन की राजनीतिक यात्रा आसान नहीं रही। बरसों तक वे पार्टी में सबसे तेज माने जाते थे, लेकिन बड़े पदों से वंचित रहे। KSU का अध्यक्ष पद, यूथ कांग्रेस का अध्यक्ष पद, KPCC का अध्यक्ष पद और 2011 में मंत्री पद – ये सब उनके हाथ से फिसलते रहे। पार्टी के भीतर वे “हमेशा दूसरे नंबर पर” माने जाते रहे।
लेकिन इसके बावजूद उन्होंने अपनी मेहनत और तैयारी जारी रखी। पारावूर को एक वामपंथी गढ़ से कांग्रेस की सुरक्षित सीट में बदलने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है। 61 साल की उम्र में मुख्यमंत्री पद तक पहुंचना उनके धैर्य और लगन की कहानी है।
2026 केरल चुनाव: मतदाताओं का स्पष्ट संदेश

इस चुनाव में UDF की जीत के पीछे कई कारण माने जा रहे हैं। LDF सरकार के खिलाफ लंबे समय से जमा नाराजगी, अल्पसंख्यक वोटों का UDF के पक्ष में एकजुट होना और Chooralmala-Mundakkai आपदा जैसी घटनाओं पर सरकार की आलोचना – ये सब मिलकर इस नतीजे की वजह बने। परंपरागत रूप से केरल में UDF और LDF सरकारें एक-एक बार बदलती रही हैं। 2021 में LDF ने इस चलन को तोड़ दूसरी बार जीता था, लेकिन 2026 में यह “रिवाज” फिर से लागू हो गया।
आगे क्या होगा?
18 मई को शपथ ग्रहण समारोह के बाद सतीशन केरल के मुख्यमंत्री बन जाएंगे और नई UDF सरकार का गठन होगा। अब सबकी नजर इस बात पर है कि सतीशन के मंत्रिमंडल में कौन-कौन से चेहरे शामिल होंगे। UDF गठबंधन में IUML, केरल कांग्रेस और RSP जैसे कई दल हैं, जिन्हें उचित प्रतिनिधित्व देना सतीशन के लिए पहली बड़ी चुनौती होगी। इसके साथ ही चुनाव के दौरान की गई “इंदिरा गारंटी” वादों को जमीन पर उतारना – जैसे मुफ्त बस यात्रा, स्वास्थ्य बीमा योजना, वरिष्ठ नागरिक कल्याण – भी नई सरकार का तत्काल एजेंडा होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
प्रश्न 1: वी.डी. सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री कब घोषित किया गया?
उत्तर: 14 मई 2026 को नई दिल्ली में AICC मुख्यालय में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिये वी.डी. सतीशन को केरल का मुख्यमंत्री घोषित किया गया। केरल में 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव हुए थे और 4 मई को नतीजे आए थे, लेकिन सीएम पद को लेकर पार्टी के भीतर खींचतान के चलते फैसला दस दिन बाद हो सका।
प्रश्न 2: वी.डी. सतीशन कब शपथ लेंगे?
उत्तर: पार्टी सूत्रों के मुताबिक वी.डी. सतीशन 18 मई 2026 को केरल के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे। इससे पहले वे राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश कर चुके हैं।
प्रश्न 3: 2026 के केरल विधानसभा चुनाव में UDF को कितनी सीटें मिलीं?
उत्तर: 140 सदस्यीय केरल विधानसभा में कांग्रेस नीत UDF ने 102 सीटें जीतीं। कांग्रेस ने अकेले 63 सीटें जीतीं और IUML ने 22 सीटें हासिल कीं। वहीं LDF 35 सीटों पर सिमट गया और BJP ने तीन सीटें जीतीं। UDF की यह जीत 1977 के बाद गठबंधन की सबसे बड़ी जीत मानी जा रही है।
प्रश्न 4: पिनराई विजयन अब क्या भूमिका निभाएंगे?
उत्तर: CPI(M) की राज्य समिति ने सर्वसम्मति से पिनराई विजयन को 16वीं केरल विधानसभा में विपक्ष का नेता चुना है। वे LDF के 35 विधायकों की ओर से विपक्ष बेंच का नेतृत्व करेंगे। पिनराई 2016 से 2026 तक केरल के मुख्यमंत्री रहे थे – यह पहली बार है कि वे विपक्ष के नेता की भूमिका में आएंगे।
प्रश्न 5: वी.डी. सतीशन का राजनीतिक जीवन कैसा रहा है?
उत्तर: वी.डी. सतीशन 1964 में कोच्चि के पास नेट्टूर में पैदा हुए। पेशे से वकील सतीशन ने अपना राजनीतिक करियर KSU से शुरू किया। 1996 में पहली बार पारावूर से विधानसभा चुनाव लड़ा, हार गए। 2001 में जीते और तब से 2026 तक लगातार छह बार विधायक बने। 2021 से वे केरल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष थे। अपने करियर में वे कई बार बड़े पद पाने से चूके लेकिन आखिरकार 61 साल की उम्र में मुख्यमंत्री पद तक पहुंचे।
प्रश्न 6: सीएम पद के लिए सतीशन के अलावा और कौन से नाम दौड़ में थे?
उत्तर: सतीशन के अलावा AICC के महासचिव (संगठन) के.सी. वेणुगोपाल और वरिष्ठ कांग्रेस नेता रमेश चेन्नीथला भी इस दौड़ में प्रमुख दावेदार थे। रिपोर्ट्स के अनुसार वेणुगोपाल को कांग्रेस विधायकों के एक बड़े हिस्से का समर्थन था, जबकि सतीशन को गठबंधन के साथी दलों और जमीनी कार्यकर्ताओं का समर्थन था। अंततः हाईकमान ने सतीशन को चुना।
प्रश्न 7: केरल में UDF की इस बड़ी जीत की वजह क्या मानी जा रही है?
उत्तर: विश्लेषकों के अनुसार LDF की दस साल की सत्ता के खिलाफ जमा नाराजगी (एंटी-इनकम्बेंसी), अल्पसंख्यक वोटों का बड़े पैमाने पर UDF के पक्ष में आना, कई मंत्रियों के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप और Chooralmala-Mundakkai जैसी प्राकृतिक आपदाओं पर सरकार की कथित लापरवाही – ये सब मिलकर इस भारी जीत के कारण बने। LDF के 21 मंत्रियों में से 13 अपनी सीटें हार गए।
प्रश्न 8: क्या यह पहली बार है कि केरल में Communist पार्टी किसी राज्य में सत्ता में नहीं है?
उत्तर: हाँ, रिपोर्ट्स के अनुसार यह लगभग पचास वर्षों में पहला मौका है जब भारत के किसी भी राज्य में कम्युनिस्ट पार्टी की सरकार नहीं है। CPI(M) द्वारा 1964 में स्थापित होने के बाद से केरल ने हमेशा किसी न किसी रूप में वामपंथी सरकार देखी थी, लेकिन 2026 के नतीजों ने इस इतिहास को बदल दिया।
