भोपाल/उज्जैन – मध्य प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में आज उस वक्त एक बड़ा भूचाल आ गया, जब मुख्यमंत्री मोहन यादव के परिवार और उनसे जुड़ी रियल एस्टेट कंपनियों द्वारा उज्जैन में की गई बड़े पैमाने पर जमीन खरीद को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ। अंग्रेजी समाचार पत्र ‘The Indian Express’ की एक बेहद विस्तृत खोजी रिपोर्ट (Investigative Report) के अनुसार, MP CM Mohan Yadav Ujjain Land Deal Controversy के केंद्र में उज्जैन और उसके आसपास की वह बेशकीमती जमीनें हैं, जिन्हें मुख्यमंत्री और उनके करीबियों ने बीते दो साल में खरीदा है।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस जमीन बैंक (Land Bank) के आसपास ही राज्य सरकार ने हाल ही में नई चमचमाती सड़कों, हाईवे और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं (Infrastructure Projects) की घोषणा की है। इस खुलासे के बाद कांग्रेस ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) और मुख्यमंत्री मोहन यादव के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, जिससे सूबे की सियासत बेहद गर्म हो गई है।
13 दिसंबर 2023 को मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद से मोहन यादव के परिवार के सदस्यों और उनकी रियल एस्टेट कंपनियों ने मिलकर कम से कम 137 प्लॉट खरीदे, जो कुल 168 एकड़ में फैले हैं और जिनकी कीमत 45 करोड़ रुपये है। इनमें से अधिकतर जमीनें उन्हीं इलाकों में हैं जहां सरकार ने सड़क निर्माण परियोजनाएं घोषित कीं या जिन्हें उज्जैन मास्टर प्लान 2035 के तहत खेती की जमीन से आवासीय या व्यावसायिक श्रेणी में बदला गया।
क्या है पूरा मामला? जानिए जमीन खरीद का पूरा गणित
द इंडियन एक्सप्रेस की पड़ताल के मुताबिक, 13 दिसंबर 2023 को जब मोहन यादव ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद की शपथ ली, उसके बाद से लेकर दिसंबर 2025 तक उनके परिवार और उनसे जुड़ी चार प्रमुख रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन और उसके आसपास के इलाकों में बेहद आक्रामक तरीके से जमीनों की खरीद-फरोख्त की।
सरकारी भू-अभिलेख रिकॉर्ड (Khatauni Records) के विश्लेषण से सामने आया है कि इस दो साल की अवधि में मुख्यमंत्री के तत्काल परिवार के सदस्यों, भाइयों और चचेरे भाइयों ने कम से कम 137 भूखंड (Plots) खरीदे हैं। इन सभी प्लॉटों का कुल क्षेत्रफल लगभग 168 एकड़ बताया जा रहा है, जिसकी कुल घोषित सरकारी या रजिस्ट्री कीमत करीब 45 करोड़ रुपये है। इस डेटा में साल 2026 में हुए हालिया सौदे शामिल नहीं हैं क्योंकि उनके आधिकारिक रिकॉर्ड अभी पूरी तरह अपडेट होने की प्रक्रिया में हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स और ‘लैंड यूज’ का खेल: कैसे बढ़ा जमीनों का दाम?

इस पूरी MP CM Mohan Yadav Ujjain Land Deal Controversy में सबसे बड़ा सवाल ‘कॉन्फ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट’ (हितों के टकराव) और नीतियों के क्रियान्वयन को लेकर उठ रहा है। रिपोर्ट के अनुसार, परिवार द्वारा खरीदी गई कुल 168 एकड़ जमीन में से लगभग 111 एकड़ जमीन सीधे उन क्षेत्रों और गांवों में स्थित है, जहां मोहन यादव सरकार के आने के बाद नए रोड लिंक, हाईवे या सड़कों को फोर-लेन (Four-Lane) करने की मंजूरी दी गई है।
प्रमुख रूप से ये जमीनें उज्जैन के गंगेड़ी, उन्हेल, जयवंतपुरा और चंदेसरा जैसे रणनीतिक गांवों में केंद्रित हैं:
- गंगेड़ी (उज्जैन-इंदौर हाईवे के पास): यहां अप्रैल 2024 के बाद से मुख्यमंत्री के परिवार ने अलग-अलग डील्स के जरिए करीब 51 एकड़ के 38 प्लॉट खरीदे। इसके तुरंत बाद सरकार की तरफ से बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की घोषणाएं हुईं।
- जयवंतपुरा (उज्जैन-मक्सी रोड): इस मार्ग को वर्तमान में फोर-लेन में बदला जा रहा है। इसके ठीक दक्षिणी हिस्से में साल 2024-25 के दौरान 6 एकड़ के 12 प्लॉट खरीदे गए।
- चंदेसरा: दो प्रमुख इंदौर-उज्जैन हाईवे के बीच स्थित इस बेहद महत्वपूर्ण इलाके में पिछले साल फरवरी में लगभग 9 एकड़ जमीन खरीदी गई।
इसके अलावा, इन जमीनों का एक बड़ा हिस्सा ‘उज्जैन मास्टर प्लान 2035’ के तहत उस जोन में आता है, जिसे कृषि भूमि (Agricultural Land) से बदलकर आवासीय (Residential) या व्यावसायिक (Commercial) उपयोग के लिए अधिसूचित (Demarcated) किया गया है। भूमि उपयोग के इस बदलाव (Land Use Change) के कारण स्थानीय प्रॉपर्टी डीलरों के अनुसार, इन जमीनों की बाजार कीमत रातों-रात आसमान छूने लगी है, जिससे शुरुआती निवेशकों को बेतहाशा मुनाफा होने की उम्मीद है।
उज्जैन क्यों बना जमीन निवेश का केंद्र?
पिछले कुछ वर्षों में उज्जैन का महत्व तेजी से बढ़ा है। महाकाल कॉरिडोर परियोजना, धार्मिक पर्यटन में बढ़ोतरी, सिंहस्थ 2028 की तैयारियां और कई नई सड़क परियोजनाओं ने शहर को निवेश का केंद्र बना दिया है। सरकार द्वारा विभिन्न मार्गों के चौड़ीकरण, नए कॉरिडोर और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी बढ़ाने के प्रयास भी किए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी बड़े शहर में जब सड़क, हाईवे या शहरी विस्तार की योजनाएं आती हैं तो आसपास की जमीनों की कीमतें बढ़ना सामान्य बात होती है। इसी कारण रियल एस्टेट निवेशक भविष्य की संभावनाओं वाले क्षेत्रों में पहले से जमीन खरीदने की कोशिश करते हैं।
मुख्यमंत्री बनने के बाद अचानक तेज हुई खरीद की रफ्तार
ऐसा नहीं है कि यादव परिवार अचानक से रियल एस्टेट सेक्टर में उतरा है, लेकिन मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने के बाद जमीनें खरीदने की रफ्तार कई गुना बढ़ गई। रिकॉर्ड दर्शाते हैं कि साल 2021 से 2023 के बीच (जब मोहन यादव राज्य के शिक्षा मंत्री थे), तब उनके परिवार ने करीब 57 प्लॉट (86 एकड़) खरीदे थे।
यदि पुराने और नए सभी भूखंडों को जोड़ दिया जाए, तो वर्तमान में यादव परिवार और उनसे संबंधित कंपनियों के पास उज्जैन और आसपास के क्षेत्रों में कुल 245 प्लॉट हैं, जो 335 एकड़ से अधिक के विशाल लैंड बैंक में तब्दील हो चुके हैं।
किन-किन पारिवारिक सदस्यों और कंपनियों के नाम हैं रजिस्ट्रियां?
सरकारी दस्तावेजों और खतौनी के अनुसार, इन संपत्तियों को खरीदने वालों में मुख्यमंत्री मोहन यादव की पत्नी सीमा यादव, उनके बेटे वैभव यादव की पत्नी शालिनी यादव, भाई नंदलाल यादव और नारायण यादव, नारायण यादव की पत्नी रेखा, उनके बेटे अभय यादव, और मुख्यमंत्री के चचेरे भाई गोविंद व नीलेश यादव शामिल हैं।
इसके अतिरिक्त, जमीनों की खरीद-फरोख्त मुख्य रूप से चार पारिवारिक रियल एस्टेट कंपनियों के जरिए की गई:
- सिद्धि विनायक डेवकॉन प्राइवेट लिमिटेड: इस कंपनी में मुख्यमंत्री मोहन यादव और उनकी पत्नी सीमा यादव की कुल 73 प्रतिशत हिस्सेदारी है, जबकि उनके बेटे वैभव यादव इसके वर्तमान डायरेक्टर हैं। इस कंपनी ने साल 2024-25 के दौरान कई महत्वपूर्ण प्लॉट खरीदे।
- श्रेयावी डेवलपर्स
- मंगलमूर्ति इंफ्रा
- राधा माधव कंस्ट्रक्शंस
राजनीतिक गलियारों में हंगामा: कांग्रेस ने लगाया ‘महाकाल की भूमि की लूट’ का आरोप
इस खोजी रिपोर्ट के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दल कांग्रेस आक्रामक मुद्रा में आ गया है। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर रिपोर्ट साझा करते हुए इसे सीधे तौर पर सत्ता का दुरुपयोग करार दिया।
कांग्रेस का आधिकारिक बयान: “मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री के पद पर बैठते ही सत्ता की ताकत का इस्तेमाल अपने परिवार की तिजोरी भरने के लिए किया गया। जिन क्षेत्रों में सरकार विकास कार्यों और सड़कों का जाल बिछाने का फैसला ले रही थी, वहां पहले से ही मुख्यमंत्री के परिवार द्वारा कौड़ियों के दाम पर जमीनें दबा ली गईं। यह सीधे तौर पर हितों के टकराव का मामला है।”
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भी मुख्यमंत्री पर तीखा हमला बोलते हुए पूछा, “मुख्यमंत्री जी, सत्ता की ये नई सड़कें और हाईवे जनता की भलाई के लिए बन रहे हैं या फिर आपके अपने परिवार की अकूत संपत्ति को बढ़ाने के लिए? जनता को इसका जवाब मिलना चाहिए।”
सरकार और मुख्यमंत्री के परिवार का क्या है पक्ष?
इस पूरे विवाद और MP CM Mohan Yadav Ujjain Land Deal Controversy पर हालांकि मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) या भाजपा की ओर से अभी तक कोई विस्तृत आधिकारिक राजनीतिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों और मुख्यमंत्री के परिवार के व्यावसायिक विंग ने इस पर अपनी स्थिति स्पष्ट करने की कोशिश की है।
राज्य सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया:
“मुख्यमंत्री के परिवार के निजी व्यवसाय या उनके जमीन के लेन-देन को मुख्यमंत्री पद और उनके कार्यालय से जोड़कर देखना बिल्कुल भी उचित नहीं है। सरकार के विकास कार्य और सड़क परियोजनाएं व्यापक जनहित और सिंहस्थ कुंभ 2028 की तैयारियों को ध्यान में रखकर तय की जाती हैं, न कि किसी निजी फायदे के लिए।”
वहीं, मुख्यमंत्री के चचेरे भाइयों (गोविंद और नीलेश यादव) की तरफ से उनके बेटे अनंत यादव ने मीडिया से बातचीत में परिवार का बचाव करते हुए कहा:
“हमारा परिवार साल 2010 से ही पूरी तरह से रियल एस्टेट और कॉलोनाइजर के वैध कारोबार में सक्रिय है। मेरे पिता ने उस समय 100 बीघा जमीन पर पहला बड़ा प्रोजेक्ट विकसित किया था। हमारे कई हाउसिंग प्रोजेक्ट्स पहले से चल रहे हैं। एक निजी नागरिक (Private Individuals) होने के नाते, हमें देश के किसी भी हिस्से में वैध तरीके से जमीन खरीदने, उसे विकसित करने या बेचने का पूरा संवैधानिक अधिकार है। इसे किसी राजनीतिक पद से नहीं जोड़ा जाना चाहिए।”
क्या किसी जांच एजेंसी ने मामला दर्ज किया है?
23 जून 2026 तक उपलब्ध सार्वजनिक जानकारी के अनुसार किसी केंद्रीय या राज्य जांच एजेंसी द्वारा मुख्यमंत्री या उनके परिवार के खिलाफ इस मामले में कोई आपराधिक मामला दर्ज किए जाने की सूचना नहीं है। यह विवाद फिलहाल मीडिया रिपोर्ट, राजनीतिक आरोपों और सार्वजनिक बहस तक सीमित है।
राजनीतिक असर कितना बड़ा हो सकता है?

मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है और डॉ. मोहन यादव राज्य के मुख्यमंत्री हैं। ऐसे में विपक्ष इस मुद्दे को आने वाले समय में बड़े राजनीतिक अभियान के रूप में इस्तेमाल कर सकता है। दूसरी ओर भाजपा इस मामले को राजनीतिक आरोप बताकर खारिज करने की कोशिश कर रही है। आने वाले दिनों में यदि कोई आधिकारिक जांच होती है या अतिरिक्त दस्तावेज सामने आते हैं तो यह मुद्दा और बड़ा रूप ले सकता है।
फिलहाल राजनीतिक बहस का केंद्र यही है कि क्या विकास परियोजनाओं और जमीन खरीद के बीच कोई प्रत्यक्ष संबंध था या यह केवल संयोग और सामान्य व्यावसायिक निवेश का मामला है। इसका अंतिम उत्तर किसी स्वतंत्र जांच या न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
मोहन यादव परिवार लैंड डील विवाद ने मध्य प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू कर दी है। उपलब्ध दस्तावेजों और मीडिया रिपोर्टों के आधार पर जमीन खरीद के तथ्य सामने आए हैं, लेकिन किसी प्रकार की अवैधता अभी तक सिद्ध नहीं हुई है। विपक्ष सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार और अधिकारी इन आरोपों को संदर्भ से हटाकर देखने की बात कह रहे हैं। ऐसे में यह मामला आने वाले दिनों में राज्य की राजनीति का प्रमुख विषय बना रह सकता है।
पत्रकारिता के दृष्टिकोण से सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि आरोप और तथ्य अलग-अलग हैं। जब तक किसी सक्षम संस्था द्वारा जांच पूरी नहीं होती, तब तक सभी पक्षों को समान महत्व देते हुए तथ्यों के आधार पर रिपोर्टिंग करना ही उचित होगा।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
प्रश्न 1: MP CM Mohan Yadav Ujjain Land Deal Controversy असल में क्या है?
उत्तर: यह विवाद तब शुरू हुआ जब एक खोजी रिपोर्ट में यह बात सामने आई कि दिसंबर 2023 में मोहन यादव के मुख्यमंत्री बनने के बाद उनके परिवार के सदस्यों और उनकी चार रियल एस्टेट कंपनियों ने उज्जैन में करीब 45 करोड़ रुपये खर्च करके 168 एकड़ जमीन (137 प्लॉट) खरीदी। आरोप है कि इनमें से 111 एकड़ जमीन ठीक उन्हीं रास्तों और गांवों में है, जहां मुख्यमंत्री द्वारा नई सड़क और हाईवे परियोजनाओं की घोषणा की गई, जिससे इन जमीनों के दाम तेजी से बढ़ गए।
प्रश्न 2: मुख्यमंत्री बनने से पहले यादव परिवार के पास कितनी जमीन थी?
उत्तर: सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, मुख्यमंत्री बनने से पहले भी यादव परिवार के पास उज्जैन के आसपास लगभग 108 प्लॉट (करीब 179 एकड़ जमीन) मौजूद थी। इसमें से एक बड़ा हिस्सा (85 एकड़) साल 2021 से 2023 के बीच खरीदा गया था, जब मोहन यादव प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा मंत्री के पद पर कार्यरत थे। वर्तमान में उनके कुल लैंड बैंक का आकार 335 एकड़ से अधिक हो चुका है।
प्रश्न 3: इस विवाद पर मुख्यमंत्री के परिवार और रियल एस्टेट कंपनियों का क्या कहना है?
उत्तर: मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों (जैसे उनके भतीजे अनंत यादव) का कहना है कि उनका परिवार राजनीतिक पदों पर आने से बहुत पहले, यानी साल 2010 से ही उज्जैन में रियल एस्टेट और कॉलोनाइजर का वैध बिजनेस कर रहा है। उनका तर्क है कि एक स्वतंत्र नागरिक और व्यवसायी होने के नाते उन्हें कोई भी निजी जमीन खरीदने, बेचने या विकसित करने का कानूनी अधिकार है और इस व्यापार का मुख्यमंत्री कार्यालय से कोई लेना-देना नहीं है।
प्रश्न 4: उज्जैन मास्टर प्लान 2035 का इस जमीन सौदे से क्या संबंध है?
उत्तर: उज्जैन मास्टर प्लान 2035 को मई 2023 में जारी किया गया था। इस प्लान में शहर के कई बाहरी इलाकों की कृषि भूमि (खेती की जमीन) को बदलकर आवासीय या व्यावसायिक विकास के लिए मंजूरी दी गई थी। आरोप है कि यादव परिवार और उनकी कंपनियों ने इन बदलावों वाले क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर समय रहते निवेश किया, जिससे सिंहस्थ कुंभ 2028 से पहले उन्हें भारी कमर्शियल लाभ मिलने की उम्मीद है।
