Advocate Vs Police: राजस्थान में पहली दफ़ा Bar Association प्रेसिडेंट ने उड़ाए पुलिस के छक्के — ‘कमजोर पे जुल्म करके ये काहे के सिंघम?’

Published on: 08-07-2025
In Udaipur city of Rajasthan, lawyers have been protesting against the police for the past four days.

’15-20 सालों तक एक ही जगह जमे रहकर करते हैं भू माफिया से सांठगाँठ, मामूली सेलेरी में कैसे बना लेते हैं फार्म हाउस और बंगले’ 

राजस्थान– उदयपुर शहर में पिछले चार दिनों से अधिवक्ताओं ने पुलिस के विरोध में मोर्चा खोल रखा है। 4 जुलाई से वकीलों का आंदोलन जारी है, जिसमें न्यायिक कार्य ठप रहे, इस दौरान कलेक्ट्रेट पर भीषण प्रदर्शन हुआ और नारेबाजी करते हुए वकीलों ने कलेक्ट्रेट में जबरन घुसने की कोशिश की। मंगलवार को भी कोर्ट में हडताल रही जिसके कारण न्यायिक कार्य नहीं हुए। कुछ वकील दीवार फांदकर अंदर पहुंच गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी रही। यह आंदोलन तीन अधिवक्ताओं के साथ हुई हिंसक घटनाओं में आरोपियों की गिरफ्तारी न होने के विरोध में किया गया।

इस आंदोलन के केंद्र में उदयपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रभान सिंह शक्तावत का वह विस्फोटक बयान है, जिसमें उन्होंने पुलिस व्यवस्था को पूरी तरह भ्रष्ट और राजनीतिक दबाव में काम करने वाला बताया। शक्तावत की स्पीच सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रही है जिसमें उन्होंने खुलकर पुलिसिंग व्यवस्था में व्याप्त कमियों और भ्रष्टाचार पर निशाना साधा। प्रदर्शन के दौरान “खाकी चोर है” के नारे ने सुर्खियां बटोरीं। 

उदयपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रभान सिंह शक्तावत
उदयपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चंद्रभान सिंह शक्तावत

Filterless चैनेल को दिए एक इंटरव्यू में चंद्रभान सिंह शक्तावत पुलिस व्यवस्था पर जमकर बरसे और कहा, “हमारी एक महिला अधिवक्ता के साथ दुष्कर्म का प्रयास हुआ, उसके घर पर हमला हुआ, लेकिन आरोपी थाने में घंटों बैठकर चला गया और पुलिस कुछ नहीं कर पाई। हमारे पूर्व महासचिव रामलाल जाट पर सरेआम जानलेवा हमला हुआ, सारे सबूत होने के बावजूद कोई गिरफ्तारी नहीं हुई। अधिवक्ता रविश धाबाई के घर में घुसकर उन पर हमला किया गया, लेकिन पुलिस ने आंखें मूंद लीं। अगर वकीलों को ही न्याय नहीं मिल रहा, तो आम आदमी की क्या हालत होगी? 

उन्होंने आगे कहा – “पोलिसिंग में बदलाव की जरूरत है, ये लोग मेकेनाइज्ड क्राइम की तरह काम करते हैं , आप देखेंगे की चुनिन्दा सीआई  हैं जो ‘कमाई वाले थानों’ में ही पोस्टिंग लेते रहते हैं  जिन्हें ये कमाई वाला थाना कहते हैं, इनके नीचे टीम होती है उसको साथ लेकर चलते हैं , नीचे काम करने वाले कांस्टेबल को ये साथ लेकर चलते हैं और उसी पर भरोसा करके काम करते हैं , आम आदमी को बिना पैसा दिए थानों में काम नहीं हो सकता है…  इनके जयपुर तक ग्रुप्स बने होते  हैं इसलिए इनके हौसले बुलंद हैं” 

शक्तावत ने पुलिस के काम करने के तरीके पर कठोर सवाल उठाए: “ये खुद को ‘सिंघम’ समझते हैं, लेकिन असली सिंघम तो वह होता है जो ताकतवर अपराधियों से लड़े। ये कमजोरों को प्रताड़ित करके सिंघम बनने का दिखावा करते हैं। 

सनसनीखेज आरोपों की कड़ी में शक्तावत ने साफ़ बोला कि इनकी  क्लियर   ट्रान्सफर पालिसी  बहुत जरूरी है क्योंकि 15-20 सालों तक पुलिस वाले एक ही जगह टिके रहते हैं, इनका  भू माफिया के साथ नेक्सस बन जाता है..आप किसी भी थाने  में जाईये , ये माफिया वाले सी आई के कमरों में बैठे रहते हैं . चन्द्रभान ने आगे कहा, ”  एडवोकेट कानून के दायरे में रहकर काम करता है लेकिन पुलिस  ambitious & greedy हो गई है. इनको सब मामले थानों में निबटाने हैं , और तो और अब ये तय करते हैं कि अमुक केस में एडवोकेट कौन होगा? …क्या कब्जे हटाना पोलिस का काम है – नहीं ये सिविल कोर्ट का काम है ।  

उन्होंने राजनीतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए कहा, “डीजीपी की नियुक्ति से लेकर थाने तक हर जगह राजनीतिक दखल है। एक्सीडेंट के मामले में भी  जहाँ दया दिखानी चाहिए,  ये पीड़ित परिवार से पैसे की उम्मीद करते हैं।”

उन्होंने पुलिस वालों की अवैध कमाई पर निशाना साधते हुए कहा – आजकल सभी के बंगले और फार्म हॉउस है …मैं पुलिस महानिदेशक से अनुरोध करूंगा ये जांच करे कि जब इनकी नौकरी लगी थी तब इनके पास क्या सम्पत्ति थी और आज  40-70 हजार रूपये की तनख्वाह में ये सब कैसे बनाये, इतनी तनख्वाह में आदमी सिर्फ अपना घर चला सकता है और बच्चों को पढ़ा सकता है। शक्तावत ने यह भी कहा की सभी पुलिसवाले बेईमान नहीं है लेकिन अगर 1000 हैं तो इनमे 990 बेईमान हैं।

शक्तावत ने कुछ मीडिया चैनलों पर भी सवाल उठाए: “कई मीडियाकर्मी पुलिस अधिकारियों के साथ  रात की पार्टियों में देखे जाते हैं। क्या ये चैनल निष्पक्ष हैं? लोकतंत्र के चौथे स्तंभ को अपनी जिम्मेदारी समझनी चाहिए।”

तीन वकीलों पर हमले, पुलिस ने नहीं की थी  कार्रवाई

  1. महिला अधिवक्ता के साथ दुष्कर्म का प्रयास – घंटाघर थाने में दर्ज इस मामले में आरोपी न केवल फरार है, बल्कि उसने पीड़िता के घर पर हमला भी किया।
  2. पूर्व महासचिव रामलाल जाट पर जानलेवा हमला – सवीना थाना क्षेत्र में हुए इस हमले में आरोपियों के खिलाफ FIR दर्ज होने के बावजूद कोई गिरफ्तारी नहीं हुई।
  3. अधिवक्ता रविश धाबाई पर रात में घर में घुसकर हमला – घंटाघर थाने में दर्ज मामले में भी पुलिस ने कार्रवाई नहीं की ।

प्रदर्शन के बाद पुलिस ने दो मामलों में आरोपियों को गिरफ्तार किया, जबकि तीसरे मामले में 2 दिन का समय मांगा। बार एसोसिएशन ने चेतावनी दी कि यदि शेष आरोपी नहीं पकड़े गए, तो आसपास के जिलों के वकीलों को भी आंदोलन में शामिल किया जाएगा।

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