कोच्चि, –Dileep लगभग नौ साल पुराने इस बेहद चर्चित और संवेदनशील मामले में आज एर्नाकुलम प्रिंसिपल सेशंस कोर्ट ने अपना अंतिम फैसला सुना दिया। मलयालम अभिनेता दिलीप (पी गोपालकृष्णन) को सभी आरोपों से पूरी तरह बरी कर दिया गया है, जबकि मुख्य आरोपी पल्सर सुनी सहित छह लोगों को 20-20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।
कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अभियोजन पक्ष दिलीप के खिलाफ षड्यंत्र के आरोप को पुख्ता सबूतों से साबित नहीं कर सका। वहीं, पीड़िता के वकील और केरल सरकार ने कहा है कि वे इस फैसले के खिलाफ केरल हाई कोर्ट में अपील दाखिल करेंगे।
क्या थी घटना
17 फरवरी 2017 की रात एक मशहूर मलयालम अभिनेत्री थ्रिसूर से कोच्चि की ओर जा रही थीं। रास्ते में आठानी के पास कुछ लोगों ने नकली सड़क हादसा रचकर उनकी कार पर कब्जा कर लिया। उन्हें एक सुनसान जगह ले जाकर यौन उत्पीड़न किया और इस पूरी घटना का वीडियो भी बना लिया।

पीड़िता ने किसी तरह बच निकलकर घर पहुंचीं और परिवार को बताया। अगले दिन उन्होंने पुलिस में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने जल्द ही सात लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें ड्राइवर मार्टिन एंटनी और मुख्य आरोपी सुनील कुमार उर्फ पल्सर सुनी शामिल थे।
दिलीप पर आरोप लगने का कारण
पुलिस ने जांच के दौरान दावा किया कि यह अपराध कोई साधारण घटना नहीं थी, बल्कि एक सोची-समझी बदले की साजिश थी। अभिनेत्री ने पहले दिलीप की तत्कालीन पत्नी मंजू वारियर को दिलीप के कव्या माधवन से संबंध के बारे में बताया था। इसी बात से दिलीप नाराज थे।
पुलिस का आरोप था कि दिलीप ने पल्सर सुनी को पैसे देकर हमला करवाया और वीडियो बनवाया ताकि अभिनेत्री को बदनाम किया जा सके। जुलाई 2017 में पल्सर सुनी की जेल से लिखी एक चिट्ठी मिलने के बाद पुलिस ने दिलीप को गिरफ्तार किया। वे 83 दिन जेल में रहे और फिर जमानत पर रिहा हो गए।
सुनवाई में क्या-क्या हुआ
ट्रायल मार्च 2018 में शुरू हुआ और सात साल से ज्यादा चला। कोर्ट में 261 गवाहों के बयान दर्ज हुए, जिनमें कई बड़े फिल्मी सितारे शामिल थे। कुछ गवाह बाद में अपने बयान से मुकर गए। कोरोना महामारी और अन्य कारणों से भी केस में काफी देरी हुई।
पीड़िता ने कई बार जज बदलने की मांग की, क्योंकि ट्रायल उन्हें मानसिक रूप से परेशान कर रहा था, लेकिन हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज कर दिया। कोर्ट ने पीड़िता की पहचान छिपाने के लिए बंद कमरे में सुनवाई की।
8 दिसंबर का फैसला
8 दिसंबर 2025 को जज हनी एम वर्गीज ने फैसला सुनाया। कोर्ट ने दिलीप को आपराधिक षड्यंत्र (IPC 120B), सबूत नष्ट करने (IPC 201, 204) और आईटी एक्ट के सभी आरोपों से बरी कर दिया।

कोर्ट ने पल्सर सुनी, मार्टिन एंटनी, माणिकंदन बी, विजेश वीपी, सलीम एच और प्रदीप को गैंग रेप, अपहरण, गैरकानूनी तरीके से रोकने और शील भंग के आरोपों में दोषी ठहराया। तीन अन्य आरोपी – चार्ली थॉमस, सनील कुमार और शरत जी नायर – भी बरी कर दिए गए।
12 दिसंबर को सजा सुनाई गई
आज कोर्ट ने छह दोषियों को 20-20 साल की कठोर कारावास की सजा सुनाई। जज ने कहा कि यह अपराध बेहद गंभीर है और एक महिला की गरिमा को ठेस पहुंचाता है। दोषियों ने दया की गुहार लगाई, लेकिन कोर्ट ने इसे ठुकरा दिया। उनकी जमानत रद्द कर उन्हें जेल भेज दिया गया।
स्पेशल पब्लिक प्रॉसीक्यूटर वी अजा कुमार ने कहा कि वे उम्रकैद की मांग कर रहे थे, लेकिन कोर्ट ने 20 साल की सजा दी। उन्होंने कहा कि पूरा फैसला पढ़ने के बाद हाई कोर्ट में अपील करेंगे।
पक्षों की प्रतिक्रियाएं
दिलीप कोर्ट से पत्नी कव्या माधवन और बेटी के साथ निकले। उन्होंने कहा, “सच की जीत हुई है। मेरे खिलाफ आपराधिक साजिश रची गई थी। यह तब शुरू हुई जब मंजू वारियर ने इस बारे में बात की। कुछ पुलिस अधिकारी और मीडिया ने मेरी जिंदगी और करियर बर्बाद करने की कोशिश की।” उन्होंने अपने वकील के पैर छुए और कहा कि अब वे कानूनी कार्रवाई करेंगे।

केरल सरकार ने फैसले पर निराशा जताई। कानून मंत्री पी राजीव ने कहा, “पीड़िता को पूरा न्याय नहीं मिला। हम उनके साथ हैं और फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट में अपील करेंगे।”
पीड़िता की वकील टीबी मिनी ने कहा, “हमें पूरा विश्वास है कि दिलीप दोषी हैं। यह अंत नहीं है।”
महिला सिनेमा कलेक्टिव (WCC) की अभिनेत्री परवती थिरुवोथु ने सोशल मीडिया पर लिखा, “हम एक सावधानी से लिखी गई स्क्रिप्ट को इतने क्रूर तरीके से देख रहे हैं।”
अभिनेत्री रिमा कालिंगल ने लिखा, “हमेशा उनके साथ। अब और भी मजबूत होकर।”
पूर्व डीजीपी बी संध्या ने कहा, “यह अंतिम फैसला नहीं है। षड्यंत्र साबित करना बहुत मुश्किल होता है, लेकिन जांच अच्छी थी।”
मामला अभी खत्म नहीं हुआ। केरल सरकार जल्द ही हाई कोर्ट में अपील दाखिल करेगी। पीड़िता या उनके वकील भी अपील कर सकते हैं। दिलीप उन लोगों के खिलाफ मुकदमा कर सकते हैं जिन्होंने उन्हें नुकसान पहुंचाया।
इस मामले ने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में महिलाओं की सुरक्षा और ताकत के दुरुपयोग जैसे कई मुद्दे उजागर किए। इसी वजह से महिला सिनेमा कलेक्टिव (WCC) बना और आज भी महिलाओं के लिए बेहतर माहौल की लड़ाई लड़ रहा है।
कई लोग इस फैसले से संतुष्ट हैं, तो कई लोग इसे पीड़िता के लिए अधूरा न्याय मानते हैं। अब सबकी नजरें हाई कोर्ट पर टिकी हैं।

FAQ
Q1: पीड़िता कौन हैं?
पीड़िता एक मशहूर मलयालम अभिनेत्री हैं। उनकी पहचान गोपनीय रखी गई है। वे कई फिल्मों के लिए जानी जाती हैं और इंडस्ट्री में सम्मान पाती हैं।
Q2: दिलीप पर आरोप क्यों लगे?
पुलिस का कहना था कि अभिनेत्री ने दिलीप की तत्कालीन पत्नी मंजू वारियर को उनके कव्या माधवन से संबंध के बारे में बताया था। इसी वजह से दिलीप नाराज थे और उन्होंने पल्सर सुनी को पैसे देकर हमला करवाया।
Q3: क्या कोर्ट ने दिलीप को पूरी तरह बेकसूर कहा?
नहीं। कोर्ट ने सिर्फ इतना कहा कि अभियोजन पक्ष षड्यंत्र का आरोप मजबूत सबूतों से साबित नहीं कर सका। इसका मतलब यह नहीं कि वे पूरी तरह बेकसूर हैं।
Q4: दोषियों को क्या सजा मिली?
छहों को 20-20 साल की कठोर कारावास। उम्रकैद या प्रोबेशन नहीं दिया गया।
Q5: क्या केस हाई कोर्ट जाएगा?
हां। केरल सरकार ने दिलीप की बरी होने के खिलाफ अपील करने का फैसला किया है। पीड़िता भी अपील कर सकती हैं।
Q6: ट्रायल कितने साल चला?
सात साल से ज्यादा। 2018 में शुरू हुआ और 2025 में खत्म हुआ।
Q7: फैसले के बाद दिलीप ने क्या कहा?
उन्होंने कहा कि सच की जीत हुई है और उनके खिलाफ साजिश रची गई थी। उन्होंने समर्थकों का शुक्रिया अदा किया और कानूनी कार्रवाई की बात कही।
Q8: सरकार ने क्या कहा?
कानून मंत्री पी राजीव ने कहा कि सरकार पीड़िता के साथ है और फैसले के खिलाफ अपील करेगी।
Q9: यह केस क्यों महत्वपूर्ण है?
इसने मलयालम फिल्म इंडस्ट्री में सुरक्षा और ताकत के दुरुपयोग की समस्याएं उजागर कीं। इसी वजह से महिला सिनेमा कलेक्टिव (WCC) बना।
Q10: पीड़िता अब ठीक हैं?
अभिनेत्री ने कहा है कि इस घटना ने उनकी जिंदगी बदल दी। वे खुद को सर्वाइवर कहती हैं और अपनी तकलीफ के बारे में बात कर चुकी हैं। उन्हें कई लोगों का समर्थन है।
