नई दिल्ली/कवरत्ती: केंद्र शासित प्रदेश लक्षद्वीप के इतिहास में आज का दिन एक बहुत बड़ा नीतिगत मोड़ लेकर आया है। Lakshadweep Liquor Ban Repealed 2026 की आधिकारिक घोषणा के साथ ही द्वीप समूह में पिछले 47 वर्षों से चली आ रही पूर्ण शराबबंदी अब पूरी तरह से समाप्त हो गई है। भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने भारतीय संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुए ‘लक्षद्वीप आबकारी विनियमन, 2026’ (Lakshadweep Excise Regulation, 2026) को अपनी मंजूरी दे दी है। इस नए आदेश के लागू होते ही गृह मंत्रालय द्वारा वर्ष 1979 में लागू किया गया पुराना ‘लक्षद्वीप निषेध विनियमन’ (Lakshadweep Prohibition Regulation, 1979) इतिहास के पन्नों में दफन हो गया है।

केंद्रीय गृह मंत्रालय और विधि मंत्रालय द्वारा जारी गजट अधिसूचना के अनुसार, लक्षद्वीप प्रशासन अब इस खूबसूरत द्वीप समूह को मालदीव की तर्ज पर एक अंतरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करना चाहता है। हालांकि, स्थानीय मुस्लिम बहुल आबादी के बीच किसी भी संभावित सामाजिक असंतोष या विरोध को शांत करने के लिए, सरकार ने शराब की कीमतों पर बेहद भारी टैक्स (एक्साइज ड्यूटी) लगाने का फैसला किया है। इस नए कानून के तहत भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) पर 400% और बियर पर 200% की भारी-भरकम लेवी थोप दी गई है, जिससे यहाँ शराब खरीदना आम लोगों के बजट से बाहर हो जाएगा।
भारत के इस एकमात्र मुस्लिम-बहुल केंद्र शासित प्रदेश में यह बदलाव सिर्फ एक नीतिगत फैसला नहीं है। यह उस बड़े सवाल को खोलता है — क्या पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए किसी समुदाय की सांस्कृतिक और धार्मिक परंपराओं को दांव पर लगाना उचित है? सरकार का तर्क है कि यह आर्थिक विकास के लिए जरूरी कदम है। लेकिन स्थानीय नेता, सांसद और नागरिक समाज इसे बिना सहमति थोपा गया फैसला बता रहे हैं।
1979 से 2026 तक: कैसे टिकी रही 47 साल की पाबंदी?
लक्षद्वीप अरब सागर में बिखरे 36 द्वीपों का समूह है। इसकी कुल जनसंख्या करीब 65,000 है, जिसमें से लगभग 97 प्रतिशत मुस्लिम हैं। 2011 की जनगणना के अनुसार यहाँ की करीब 95 प्रतिशत आबादी अनुसूचित जनजाति से है। यह सामाजिक और धार्मिक पहचान ही इस द्वीपसमूह की खासियत रही है।
1979 में Lakshadweep Prohibition Regulation लागू किया गया था। उस समय यह फैसला यहाँ की आबादी की सामाजिक और सांस्कृतिक प्राथमिकताओं को ध्यान में रखकर लिया गया था। उसके बाद से हर सरकार ने इस पाबंदी को बनाए रखा। यह कानून यहाँ की पहचान का हिस्सा बन गया था।
हालांकि यह पाबंदी पूरी तरह एकसमान नहीं थी। पर्यटक रिसॉर्ट्स और कुछ सरकारी प्रतिष्ठानों में सीमित छूट थी। 2021 में प्रशासन ने कुछ द्वीपों पर पर्यटन के नाम पर शराब की दुकानें खोलने की अनुमति दी थी, जिसका स्थानीय स्तर पर तीव्र विरोध हुआ था। फरवरी 2026 में प्रशासन ने आठ सरकारी गेस्ट हाउसों में शराब परोसने का आदेश दिया — और सांसद मुहम्मद हमदुल्लाह सईद ने तुरंत इसे “अस्वीकार्य” बताते हुए वापस लेने की माँग की। लेकिन सरकार नहीं रुकी। 5 जून 2026 को नया विनियमन अधिसूचित हो गया।
पर्यटन को बढ़ावा: मालदीव को टक्कर देने का सरकारी ब्लूप्रिंट

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, इस ऐतिहासिक नीतिगत बदलाव के पीछे सबसे बड़ा कारण लक्षद्वीप की अर्थव्यवस्था को नया जीवन देना और इसे वैश्विक पर्यटन के नक्शे पर चमकाना है। पिछले कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों, विशेषकर यूरोपीय देशों से आने वाले सैलानियों के लिए लक्षद्वीप की सख्त शराबबंदी एक बड़ी बाधा बनी हुई थी। पर्यटन उद्योग के दिग्गजों का मानना है कि जो विदेशी पर्यटक शराब की उपलब्धता न होने के कारण भारत के बजाय मालदीव का रुख कर लेते थे, वे अब सीधे लक्षद्वीप आना पसंद करेंगे।
नया कानून लागू होने के बाद, प्रशासन चुनिंदा सरकारी निगमों, प्राधिकृत एजेंसियों और केवल विशेष रूप से लाइसेंस प्राप्त निजी होटलों व रिसॉर्ट्स को ही शराब के आयात और खुदरा बिक्री की अनुमति देगा। इसका सीधा मतलब यह है कि स्थानीय रिहायशी इलाकों में किराने की दुकानों की तरह शराब की आम दुकानें नहीं खुलेंगी। पर्यटन विभाग का लक्ष्य केवल प्रीमियम और लक्जरी टूरिज्म को बढ़ावा देना है, जिससे स्थानीय पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना राजस्व (राजकीय आय) को कई गुना बढ़ाया जा सके।
Lakshadweep Excise Regulation 2026: क्या है नया कानून?
Lakshadweep Excise Regulation 2026 एक व्यापक कानूनी ढाँचा है जो लक्षद्वीप केंद्र शासित प्रदेश में शराब के निर्माण, कब्जे, आयात, निर्यात, परिवहन, खरीद, बिक्री और उपभोग को नियंत्रित करता है। यह विनियमन राष्ट्रपति द्वारा संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत जारी किया गया है, जो केंद्र सरकार को केंद्र शासित प्रदेशों के लिए कानून बनाने की शक्ति देता है।
नए कानून की मुख्य बातें:
नए ढाँचे के तहत प्रशासन को शराब के आयात, निर्यात, निर्माण, बिक्री, खरीद और उपभोग के लिए लाइसेंस और परमिट जारी करने का अधिकार दिया गया है। सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियाँ और एजेंसियाँ भी शराब के आयात और बिक्री के लिए लाइसेंस ले सकती हैं। प्रशासन ने यह साफ कर दिया है कि यह कोई खुला बाजार नहीं होगा — हर कदम पर कड़ा नियंत्रण रहेगा।
टैक्स का कड़ा शिकंजा: IMFL पर 400% और बियर पर 200% ड्यूटी
इस नए कानून की सबसे खास बात इसकी बेहद महंगी टैक्स दरें हैं। केंद्र सरकार ने इस बात का पूरा ख्याल रखा है कि शराब की आसान उपलब्धता के कारण द्वीप के नागरिकों में लत या सामाजिक बुराइयाँ न फैलें। इसी वजह से देश में सबसे कड़ा टैक्स ढांचा यहाँ लागू किया गया है:
- भारतीय निर्मित विदेशी शराब (IMFL) और विदेशी स्पिरिट: 400% एक्साइज ड्यूटी
- बियर (Beer): 200% एक्साइज ड्यूटी
- वाइन (Wine): 80% एक्साइज ड्यूटी
तुलना के लिए, देश की राजधानी दिल्ली में शराब पर लगभग 25% वैट (VAT) वसूला जाता है। लक्षद्वीप में लगाया गया 400% का यह टैक्स देश के इतिहास में सबसे ऊंचे टैक्स स्लैब में से एक है। प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि शराब केवल उन पर्यटकों और संपन्न वर्ग के लिए होगी जो इसकी अत्यधिक कीमत चुकाने में सक्षम हैं, जिससे आम स्थानीय आबादी इसकी पहुंच से दूर रहे।
इन दरों से साफ है कि नीति का लक्ष्य आम उपभोग नहीं, बल्कि विशेष रूप से उच्च-मूल्य पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र है। नए विनियमन की अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि यह “ऐसी तिथि से लागू होगा जो प्रशासक सरकारी राजपत्र में अधिसूचना द्वारा नियत करे।” यानी अभी इसे लागू होने की एक और प्रक्रिया बाकी है।
सरकार का तर्क: मालदीव से प्रतिस्पर्धा और पर्यटन
केंद्र सरकार और लक्षद्वीप प्रशासन ने इस फैसले के पीछे मुख्य रूप से पर्यटन को आगे बढ़ाने की जरूरत का हवाला दिया है। अधिकारियों का कहना है कि पूर्ण शराब पाबंदी की वजह से लक्षद्वीप मालदीव जैसे हिंद महासागर के पर्यटन स्थलों की तुलना में बहुत पीछे रहा है। मालदीव में रिसॉर्ट-आधारित शराब की बिक्री कानूनी है, और वहाँ बड़ी संख्या में अंतरराष्ट्रीय पर्यटक आते हैं।

जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लक्षद्वीप का दौरा किया था। उनकी स्नॉर्कलिंग और समुद्र तट की तस्वीरें सोशल मीडिया पर खूब वायरल हुई थीं। इस यात्रा के बाद से लक्षद्वीप को “भारत का मालदीव” के रूप में पेश किया जाने लगा। पर्यटन के आँकड़े भी बोलते हैं — प्रशासन के अनुसार हाल के वर्षों में पर्यटकों की संख्या में 47 प्रतिशत की जबरदस्त वृद्धि हुई है।
सरकार का मानना है कि नियंत्रित तरीके से शराब की उपलब्धता पर्यटकों के लिए लक्षद्वीप को अधिक आकर्षक बनाएगी, खासकर उन अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए जो रिसॉर्ट अनुभव चाहते हैं। अधिकारियों ने यह भी कहा है कि इससे हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे, और द्वीप की अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
स्थानीय संगठनों और राजनेताओं का तीखा विरोध:“बिना सहमति थोपा गया फैसला”
Lakshadweep Liquor Ban Repealed 2026 के इस फैसले ने द्वीप के भीतर एक बड़े राजनीतिक और सामाजिक विवाद को जन्म दे दिया है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि लक्षद्वीप की कुल आबादी में लगभग 96.5% लोग मुस्लिम समुदाय से संबंध रखते हैं और वे अनुसूचित जनजाति (ST) के अंतर्गत आते हैं। धार्मिक और सांस्कृतिक मान्यताओं के कारण यहाँ का समाज पारंपरिक रूप से शराब के पूरी तरह खिलाफ रहा है। लेकिन जमीनी हकीकत बहुत अलग है। स्थानीय नेताओं, धार्मिक संगठनों और नागरिक समाज ने इस फैसले का जोरदार विरोध किया है।
लक्षद्वीप के सांसद मोहम्मद हमदुल्लाह सईद और स्थानीय नागरिक समाज संगठनों (Civil Society Groups) ने केंद्र सरकार के इस कदम की कड़े शब्दों में निंदा की है। विपक्ष का आरोप है कि केंद्र सरकार ने इस तरह का संवेदनशील और बड़ा फैसला लेने से पहले स्थानीय पंचायतों, जनप्रतिक्षियों या स्थानीय आबादी से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया।
विपक्ष और स्थानीय नागरिक मंचों का आधिकारिक बयान: > “लक्षद्वीप की शांति, कम अपराध दर और यहाँ का शांत सामाजिक ताना-बाना ही इसकी असली पहचान है। पर्यटन के नाम पर शराबबंदी हटाना हमारी सांस्कृतिक और धार्मिक जड़ों पर सीधा प्रहार है। हमें डर है कि शराब की कानूनी आमद से हमारे युवाओं में नशे की प्रवृत्ति बढ़ेगी और घरेलू हिंसा के मामलों में तेजी आएगी।”
लक्षद्वीप के सांसद मुहम्मद हमदुल्लाह सईद (कांग्रेस) ने फरवरी 2026 में ही आठ सरकारी गेस्ट हाउसों में शराब की अनुमति देने के आदेश को “अस्वीकार्य” बताया था और इसे वापस लेने की माँग की थी। उन्होंने कहा था कि लक्षद्वीप की अनूठी सामाजिक संरचना और परिस्थितियों को देखते हुए यहाँ की जनता की राय पूरी तरह शराब की नीति को वापस लेने के पक्ष में है। उन्होंने यह भी चेताया कि शराब के वितरण का विस्तार युवाओं में नशे की लत बढ़ाएगा और कानून-व्यवस्था की समस्याएँ पैदा करेगा।
स्थानीय कांग्रेस समितियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर आदेश वापस लेने की माँग की। नागरिक समाज संगठनों और मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, निवासियों का कहना है कि शराब उदारीकरण की कोशिशें बार-बार स्थानीय समुदाय की सहमति के बिना थोपी जा रही हैं।
Maktoob Media की रिपोर्ट के अनुसार निवासियों और नागरिक समाज समूहों ने बार-बार विरोध किया है, और उनका कहना है कि यह कदम उनकी भागीदारी के बिना उठाया गया है।
क्या कहता है नया प्रशासनिक ढांचा?
नए कानून के तहत, लक्षद्वीप के आबकारी विभाग को बेहद कड़े अधिकार दिए गए हैं। एक ‘आबकारी आयुक्त’ (Excise Commissioner) के नेतृत्व में एक विशेष प्रशासनिक विंग तैयार की गई है।
- उम्र की सीमा: द्वीप पर 21 वर्ष से कम आयु के किसी भी व्यक्ति को शराब बेचना, परोसना या उनके द्वारा शराब खरीदना पूरी तरह गैर-कानूनी होगा।
- प्रशासक के विशेष अधिकार: लक्षद्वीप के आबकारी कानून के तहत वहाँ के प्रशासक (Administrator) के पास यह अंतिम अधिकार सुरक्षित रहेगा कि वे जब चाहें, किसी भी द्वीप पर या पूरे केंद्र शासित प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए पूर्ण या आंशिक शराबबंदी दोबारा लागू कर सकते हैं।
- सख्त सजा के प्रावधान: अवैध रूप से शराब बनाने, परिवहन करने या बिना वैध परमिट के बेचने पर भारी जुर्माने के साथ-साथ कठोर कारावास (जेल) का प्रावधान भी नए कानून में जोड़ा गया है।
लद्दाख में भी वही कहानी, देशव्यापी बहस
यह विवाद सिर्फ लक्षद्वीप तक सीमित नहीं है। उसी समय, केंद्र सरकार ने लद्दाख में भी शराब नीति उदार की है। लद्दाख की नई उत्पाद शुल्क नीति के तहत अब IMFL और आयातित शराब की बिक्री की अनुमति दी गई है, गेस्ट हाउस और होमस्टे में भी शराब बेची जा सकेगी, और लाइसेंसी दुकानों की संख्या दो से बढ़ाकर 20 की जा रही है।
लद्दाख में लद्दाख बौद्ध संघ ने इस नीति का विरोध करते हुए “सुरक्षित, स्वस्थ और नशामुक्त भविष्य” की माँग की है। जमीयत उलमा इस्ना अशरिया कारगिल ने भी शराब की बिक्री और वितरण पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की माँग की है।
दोनों केंद्र शासित प्रदेशों में एक साथ यह बदलाव देश में एक बड़ी बहस को जन्म दे रहा है — क्या किसी इलाके की नशामुक्त परंपरा को पर्यटन नीति के नाम पर खत्म किया जा सकता है?
कानूनी पहलू: अनुच्छेद 240 और राष्ट्रपति की शक्तियाँ
भारत के संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत राष्ट्रपति को कुछ केंद्र शासित प्रदेशों के लिए नियम और विनियम बनाने की शक्ति है। लक्षद्वीप इनमें से एक है। इसी शक्ति का उपयोग करते हुए Lakshadweep Excise Regulation 2026 जारी किया गया है।
इस नीति की अधिसूचना 5 जून 2026 को Gazette of India Extraordinary, Part II में प्रकाशित की गई। इसमें यह भी कहा गया है कि पुराना Lakshadweep Prohibition Regulation 1979 औपचारिक रूप से रद्द हो गया है। हालांकि नया विनियमन उस तिथि से प्रभावी होगा जो प्रशासक अधिसूचित करेंगे — यानी जमीनी स्तर पर लागू करने की तारीख अभी तय नहीं है।
पर्यटन के आँकड़े: क्यों इतनी जल्दी?
लक्षद्वीप के पर्यटन के आँकड़े पिछले कुछ वर्षों में नाटकीय रूप से बदले हैं। प्रशासन के अनुसार पर्यटकों की संख्या में 47 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। जनवरी 2024 में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा के बाद से लक्षद्वीप अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर छा गया था।
पर्यटन उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का एक वर्ग मानता है कि लक्षद्वीप में अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए होटलों और रिसॉर्ट्स में शराब की उपलब्धता जरूरी है। उनका कहना है कि यूरोपीय और पश्चिमी पर्यटक अक्सर ऐसे गंतव्यों को प्राथमिकता देते हैं जहाँ शराब उपलब्ध हो।
हालांकि इसका दूसरा पहलू यह भी है कि लक्षद्वीप की असली ताकत उसका प्राकृतिक सौंदर्य, प्रवाल भित्तियाँ, स्वच्छ समुद्र और शांत वातावरण है — और इन्हें किसी भी शराब नीति की जरूरत नहीं है। कई पर्यावरणविद् और पर्यटन विशेषज्ञ मानते हैं कि बड़े पैमाने पर पर्यटन का विस्तार यहाँ के नाजुक पारिस्थितिक तंत्र के लिए खतरनाक हो सकता है।
सामाजिक चिंताएँ: युवा, परिवार और नशे का खतरा
लक्षद्वीप जैसे छोटे और बंद समाज में शराब की उपलब्धता के सामाजिक परिणाम बहुत गहरे हो सकते हैं। सांसद हमदुल्लाह सईद ने बार-बार इस बात पर जोर दिया है कि शराब के प्रसार से युवाओं में नशे की लत बढ़ेगी। एक ऐसे समाज में जहाँ शराब की कोई सांस्कृतिक स्वीकार्यता नहीं रही, अचानक इसकी उपलब्धता सामाजिक ताने-बाने को नुकसान पहुँचा सकती है।
इसके अलावा, कानून-व्यवस्था की समस्याएँ, पारिवारिक विवाद, और महिलाओं व बच्चों पर दुष्प्रभाव जैसी चिंताएँ भी स्थानीय समुदाय की तरफ से उठाई जा रही हैं। विरोध करने वालों का कहना है कि इस बारे में कोई ठोस सामाजिक प्रभाव मूल्यांकन (Social Impact Assessment) नहीं किया गया।
प्रशासन का रुख: नियंत्रित बाजार, खुला नहीं
प्रशासन ने बार-बार स्पष्ट किया है कि यह कोई खुला शराब बाजार नहीं बनाया जा रहा। उनका कहना है कि नई नीति पूरी तरह लाइसेंस-आधारित होगी, सरकारी एजेंसियाँ ही आयात और वितरण करेंगी, और 400 प्रतिशत तक का उत्पाद शुल्क यह सुनिश्चित करेगा कि शराब सस्ती और आसानी से उपलब्ध न हो।
प्रशासन का यह भी कहना है कि पर्यटन और स्थानीय जीवन को अलग-अलग रखा जाएगा — शराब सिर्फ लाइसेंसी होटलों, रिसॉर्ट्स और पर्यटन क्षेत्रों में ही उपलब्ध होगी, न कि आम बाजार में।
विशेषज्ञ राय: दो पहलू
पक्ष में: पर्यटन क्षेत्र से जुड़े कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम लक्षद्वीप को वैश्विक पर्यटन मानचित्र पर स्थापित करने में मदद करेगा। उनका तर्क है कि मालदीव, बाली और श्रीलंका जैसे हिंद महासागर के पर्यटन केंद्र इसलिए भी अधिक पर्यटक खींचते हैं क्योंकि वहाँ नियंत्रित तरीके से शराब उपलब्ध है। आर्थिक रूप से यह राजस्व और रोजगार दोनों बढ़ाएगा।
विरोध में: सामाजिक विश्लेषकों और स्थानीय नेताओं का कहना है कि किसी भी लोकतंत्र में ऐसे फैसले स्थानीय जनता की सहमति के बिना नहीं थोपे जाने चाहिए। 97 प्रतिशत मुस्लिम आबादी वाले इस द्वीप पर शराब नीति बदलना एक संवेदनशील मामला है। जन-परामर्श के बिना इस तरह का निर्णय लेना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।
आगे क्या? लागू होने की तारीख अभी तय नहीं
एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अधिसूचना में स्पष्ट कहा गया है कि यह विनियमन “उस तिथि से लागू होगा जो प्रशासक राजपत्र में अधिसूचित करें।” यानी जब तक प्रशासन एक अलग अधिसूचना जारी नहीं करता, जमीनी स्तर पर लाइसेंस जारी नहीं होंगे। इसका मतलब यह है कि अभी कुछ वक्त बाकी है जब स्थानीय समाज, नेता और विपक्ष इस फैसले को चुनौती देने का प्रयास कर सकते हैं।
सांसद हमदुल्लाह सईद और स्थानीय कांग्रेस नेताओं का कहना है कि वे हर लोकतांत्रिक माध्यम से इसका विरोध जारी रखेंगे। विरोध-प्रदर्शन की चेतावनी भी दी जा चुकी है।
विकास और विश्वास के बीच की लड़ाई

Lakshadweep Excise Regulation 2026 एक ऐसा फैसला है जो सिर्फ शराब के बारे में नहीं है। यह उस बड़े सवाल के बारे में है कि एक लोकतांत्रिक देश में अल्पसंख्यक और आदिवासी आबादी वाले केंद्र शासित प्रदेशों में विकास के नाम पर उनकी पहचान और परंपराओं को कहाँ तक बदला जा सकता है।
सरकार का रुख साफ है — पर्यटन को बढ़ावा देना है, मालदीव को टक्कर देनी है, और राजस्व बढ़ाना है। विरोधियों का रुख भी साफ है — जनता की सहमति के बिना कोई भी नीति थोपना अस्वीकार्य है।
आने वाले हफ्तों में जब प्रशासन इस विनियमन को लागू करने की तारीख अधिसूचित करेगा, तब असली तस्वीर और साफ होगी। तब तक लक्षद्वीप की जनता और उसके नेता इस लड़ाई को लोकतांत्रिक तरीके से लड़ने की बात कह रहे हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q1. Lakshadweep Excise Regulation 2026 क्या है?
Lakshadweep Excise Regulation 2026 एक केंद्रीय विनियमन है जिसे राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने संविधान के अनुच्छेद 240 के तहत अधिसूचित किया है। यह विनियमन लक्षद्वीप में शराब के निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, खरीद, बिक्री, कब्जे और उपभोग को नियंत्रित करने का एक व्यापक कानूनी ढाँचा है। इसके लागू होने से Lakshadweep Prohibition Regulation 1979 रद्द हो गया है, जिसने 47 वर्षों तक इस केंद्र शासित प्रदेश में पूर्ण शराब पाबंदी लागू रखी थी। नया कानून लाइसेंस-आधारित व्यवस्था पर टिका है और सरकारी एजेंसियों को शराब के आयात व वितरण की अनुमति देता है।
Q2. लक्षद्वीप में शराब पर कब से पाबंदी थी?
लक्षद्वीप में शराब पर पाबंदी 1979 से लागू थी — यानी पूरे 47 साल। Lakshadweep Prohibition Regulation 1979 के तहत यहाँ शराब की बिक्री, खरीद और उपभोग पूरी तरह प्रतिबंधित था। हालांकि कुछ पर्यटक रिसॉर्ट्स और सरकारी प्रतिष्ठानों में सीमित छूट हमेशा से थी। यह पाबंदी लक्षद्वीप की मुस्लिम-बहुल आबादी की सामाजिक और धार्मिक पहचान का हिस्सा मानी जाती थी।
Q3. नई नीति में शराब पर कितना टैक्स लगेगा?
नए विनियमन में उत्पाद शुल्क की दरें इस प्रकार हैं: Indian Made Foreign Liquor (IMFL) और आयातित विदेशी शराब पर 400 प्रतिशत, बीयर पर 200 प्रतिशत, और वाइन पर 80 प्रतिशत उत्पाद शुल्क लगेगा। ये दरें इसलिए ऊँची रखी गई हैं ताकि शराब आम उपभोग की वस्तु न बने, बल्कि केवल उच्च-मूल्य पर्यटन और हॉस्पिटैलिटी क्षेत्र तक सीमित रहे।
Q4. क्या अब लक्षद्वीप में कहीं भी शराब मिलेगी?
नहीं। यह कोई खुला बाजार नहीं है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि शराब सिर्फ लाइसेंसी प्रतिष्ठानों — जैसे लाइसेंसी होटलों, रिसॉर्ट्स और पर्यटन क्षेत्रों — में ही उपलब्ध होगी। सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियाँ ही आयात और वितरण करेंगी। आम बाजार में या स्थानीय दुकानों में शराब बेचने की अनुमति नहीं होगी।
Q5. क्या यह विनियमन अभी लागू हो गया है?
अधिसूचना 5 जून 2026 को Gazette of India में प्रकाशित हुई और इसके तहत 1979 का पुराना कानून रद्द हो गया। लेकिन नया विनियमन उस तारीख से प्रभावी होगा जो प्रशासक एक अलग राजपत्र अधिसूचना में नियत करेंगे। इसलिए अभी जमीनी स्तर पर लाइसेंस जारी नहीं हुए हैं।
Q6. स्थानीय जनता और नेता इसका विरोध क्यों कर रहे हैं?
लक्षद्वीप की 97 प्रतिशत आबादी मुस्लिम है और 95 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति से है। स्थानीय नेताओं, धार्मिक संगठनों और नागरिक समाज का कहना है कि यह फैसला जनता की सहमति के बिना थोपा गया है। सांसद हमदुल्लाह सईद ने इसे अस्वीकार्य बताया है और चेताया है कि इससे युवाओं में नशे की लत बढ़ेगी और सामाजिक समस्याएँ पैदा होंगी। कांग्रेस समितियों ने जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपे हैं और लोकतांत्रिक विरोध की चेतावनी दी गई है।
Q7. क्या यह फैसला लक्षद्वीप को मालदीव की तरह बना देगा?
सरकार का उद्देश्य लक्षद्वीप को एक वैश्विक पर्यटन हब के रूप में स्थापित करना है जो मालदीव से प्रतिस्पर्धा कर सके। नियंत्रित शराब नीति इस बड़े लक्ष्य का एक हिस्सा है। हालांकि जानकार बताते हैं कि मालदीव की तुलना में लक्षद्वीप में पर्यटन बुनियादी ढाँचा, कनेक्टिविटी और होटल क्षमता अभी भी बहुत पीछे है। केवल शराब नीति बदलने से लक्षद्वीप मालदीव नहीं बन जाएगा — इसके लिए बड़े निवेश, बेहतर एयर कनेक्टिविटी और आधारभूत ढाँचे की जरूरत है।
