आज सुबह जब मैं उठा तो खिड़की खोली और बाहर देखा – धुंध ही धुंध थी। सांस लेते ही गला खराश होने लगा। मन इतना उदास हो गया कि बस पूछो मत। ये शहर जो कभी मेरा सबसे प्यारा था, अब हर सांस के साथ डर लगने लगा है। आज 3 दिसंबर 2025 है और Delhi AQI फिर से बहुत खराब हो चुकी है – करीब 370-380 के बीच। यानी “Very Poor” से “Hazardous” की तरफ बढ़ता हुआ।
मैंने अभी-अभी चेक किया – सुबह 7 बजे के आसपास औसत AQI 376 था, दोस्तों। कुछ जगह तो 430-436 तक पहुँच गया – नेहरू नगर, चांदनी चौक, आरके पुरम… नाम सुनकर ही दिल बैठ जाता है। PM2.5 का स्तर 260-280 µg/m³ के आसपास है, जो खतरनाक से भी ऊपर है। मतलब हम जो हवा ले रहे हैं, उसमें जहर घुला हुआ है।
मुझे याद है बचपन में दिसंबर में ठंड बहुत मजा देती थी। कोहरे में छुपन-छुपाई खेलते थे, गली में। अब वही कोहरा देखकर डर लगता है – ये कोहरा नहीं, smog है भाई। सांस लेते ही सीने में जलन होती है। कल रात बेटी ने कहा, “पापा गला दुख रहा है” – बस आँखों में आंसू आ गए। हम अपने बच्चों को क्या दे रहे हैं? जहर भरी हवा?
दिल्ली की हवा अब हर साल ऐसा ही तमाशा करती है। अक्टूबर आते ही पराली का धुआँ, दिवाली के पटाखे, फिर गाड़ियों का धुआँ, कंस्ट्रक्शन की धूल, फैक्ट्रियों का जहरीला धुआँ – सब मिलकर हमें मारने पर तुल जाते हैं। ऊपर से ठंडी हवा नीचे बैठ जाती है, प्रदूषण ऊपर नहीं उठ पाता। बस हम फँस जाते हैं।
आज सुबह मैंने मास्क लगाया तो भी आँखें जल रही थीं। ऑफिस जाने का मन नहीं कर रहा था। सोचा आज वर्क फ्रॉम होम ही कर लूँ। लेकिन सबके पास ये सुविधा तो है नहीं ना? जो रिक्शा चलाने वाला भाई साहब हैं, जो सड़क पर सब्जी बेचने वाली आंटी हैं, जो कंस्ट्रक्शन पर काम करने वाले मजदूर हैं – वो क्या वो घर बैठ सकते हैं? उनका क्या कसूर है?
मैं बहुत गुस्सा भी आता है कभी-कभी। सरकार कहती है GRAP लागू कर दिया, ऑड-ईवन कर दिया, लेकिन जमीन पर कुछ नहीं बदलता। ट्रक अभी भी घुस रहे हैं, पुरानी गाड़ियाँ अभी भी चल रही हैं, कचरा अभी भी जल रहा है। हम लोग भी कितने बेशर्म हैं यार – खुद तो AC गाड़ी में बैठकर जाएंगे, लेकिन पड़ोसी अगर कचरा जलाए तो चुप रहेंगे।
पर पड़ोसी को कोसेंगे।
अब क्या करें?
- घर से बाहर निकलना ही है तो अच्छा N95 मास्क जरूर पहनो।
- बच्चों और बुजुर्गों को बिल्कुल बाहर मत निकलने दो।
- घर में एयर प्यूरीफायर चलाओ अगर हो सके।
- ज्यादा से ज्यादा पौधे लगाओ – मैंने बालकनी में तुलसी, एलोवेरा, स्नेक प्लांट लगा रखे हैं, थोड़ी सी तो राहत देते हैं।
- गाड़ी कम चलाओ, कार पूल करो, पब्लिक ट्रांसपोर्ट यूज करो।
मुझे सच में बहुत दुख होता है जब देखता हूँ कि हमारा शहर दुनिया के सबसे प्रदूषित शहरों में गिना जाता है। कभी यहां की शामें कितनी सुंदर होती थीं – इंडिया गेट पर चुस्की लेते हुए घूमना, कनॉट प्लेस की लाइट्स… अब सब धुंध में गायब।
लेकिन हार नहीं माननी है दोस्तों। हमें खुद से शुरू करना होगा। एक-एक पौधा, एक-एक सांस बचाकर हम बदलाव ला सकते हैं। सरकार पर निर्भर रहने से कुछ नहीं होगा। हमें ही अपने शहर को बचाना है।
आज Delhi AQI बहुत खराब है, कल शायद और खराब हो। लेकिन एक दिन जरूर आएगा जब हम सुबह उठकर खिड़की खोलेंगे और साफ नीला आसमान देखेंगे। बिना डरे सांस लेंगे। अपने बच्चों को बिना मास्क के बाहर खेलने देंगे।
तब तक… मास्क पहनो, एक-दूसरे का ख्याल रखो, और हिम्मत मत हारो। दिल्ली हमारी है, इसे हम ही बचाएंगे।
