लाल किला धमाका: जांच की सुई जैश-ए-मोहम्मद पर, कार मालिक डॉक्टर की मौके पर मौत; फरीदाबाद मॉड्यूल का हाथ होने की आशंका

Published on: 11-11-2025
दिल्ली लाल किला ब्लास्ट: जैश पर शक, कार मालिक डॉक्टर की मौत; फरीदाबाद मॉड्यूल की जांच जारी

नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में लाल किले के सामने हुए भीषण कार बम धमाके की जांच पाकिस्तानी आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की ओर मुड़ गई है। एजेंसियों का मानना है कि गाड़ी में IED लगाकर विस्फोट करने का यह तरीका जैश की कार्यशैली से मेल खाता है, क्योंकि उसे इस तरह के (VBIED) हमलों में महारत हासिल है।

इस घटना में इस्तेमाल की गई i20 कार का चालक, डॉ. मोहम्मद उमर, मौके पर ही मारा गया। वह मूल रूप से पुलवामा के कोइल का रहने वाला था और फरीदाबाद स्थित अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में बतौर डॉक्टर काम कर रहा था।

परिवार पर शिकंजा, 12 मोबाइल फोन जब्त

मामले की गंभीरता को देखते हुए, पुलिस ने डॉ. उमर के परिवार पर शिकंजा कसा है। फरीदाबाद से उमर की माँ और दोनों भाइयों को पूछताछ के लिए हिरासत में लिया गया है। इसके साथ ही, पुलवामा में उसके रिश्तेदारों के 12 मोबाइल फोन भी जब्त कर जांच के लिए भेजे गए हैं, ताकि किसी भी संभावित सुराग का पता लगाया जा सके।

300 मीटर तक बिखरे कार के पुर्जे

यह विस्फोट इतना शक्तिशाली था कि i20 कार के परखच्चे उड़ गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कार के हिस्से 200 से 300 मीटर के दायरे में बिखर गए। पुलिस और फोरेंसिक टीमों ने सड़क पर बिखरे कार के पुर्जे, तार और स्टीयरिंग व्हील को सबूत के तौर पर इकट्ठा किया है। बताया जा रहा है कि स्टीयरिंग पर खून के धब्बे भी पाए गए। जांचकर्ताओं का मानना है कि घटना के वक्त डॉ. उमर कार में अकेला ही सवार था।

धमाके से पहले आधा खुला बोनट?

जांच के दौरान सामने आई तस्वीरों ने एक नई गुत्थी पैदा कर दी है। तस्वीरों में कार का बोनट थोड़ा खुला (पूरी तरह बंद नहीं) दिख रहा है। इससे यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या विस्फोटक केवल कार के पिछले हिस्से में था, या इंजन में भी IED लगाया गया था?

आमतौर पर, बम को डेटोनेट करने के लिए कार की बैटरी से इलेक्ट्रिक चार्ज लेना आसान होता है। यह खुला बोनट इंजन में छेड़छाड़ की ओर इशारा कर सकता है, हालांकि पुलिस फिलहाल मुख्य विस्फोटक पीछे होने की बात कह रही है।

3 घंटे की पार्किंग, और 4 मिनट में धमाका

पुलिस ने इलाके के CCTV फुटेज खंगालकर घटना का पूरा टाइमलाइन तैयार किया है।

  • दोपहर 3:19 बजे: डॉ. उमर को अपनी i20 कार के साथ लाल किले के पास सुनहरी मस्जिद पार्किंग में एंट्री करते देखा गया।
  • (3 घंटे पार्किंग): कार करीब तीन घंटे तक वहीं खड़ी रही।
  • शाम 6:48 बजे: उमर कार को पार्किंग से बाहर निकालता हुआ कैमरे में कैद हुआ।
  • शाम 6:52 बजे: ठीक 4 मिनट बाद, कार नेताजी सुभाष मार्ग पर लाल किला मेट्रो स्टेशन के गेट नंबर एक के पास पहुंचते ही विस्फोट से उड़ गई।

200 पुलिसकर्मी खंगाल रहे CCTV

कार की ट्रैकिंग के दौरान, इसे बदरपुर बॉर्डर से दिल्ली में प्रवेश करते हुए भी CCTV में देखा गया था। दिल्ली पुलिस की कई टीमें (लगभग 200 कर्मी) बदरपुर से लाल किला पार्किंग तक के पूरे रूट, जिसमें आउटर रिंग रोड और कश्मीरी गेट शामिल हैं, के फुटेज की गहन जांच कर रही हैं। इन फुटेज के आधार पर अब तक करीब 13 संदिग्धों से पूछताछ की जा चुकी है।

विस्फोटक क्या था? ANFO पर शक

यह स्पष्ट नहीं है कि इतना भीषण धमाका करने के लिए किस विस्फोटक का इस्तेमाल किया गया। दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने फरीदाबाद क्राइम ब्रांच और J&K पुलिस से संपर्क साधा है, ताकि फरीदाबाद से हाल में बरामद विस्फोटकों की जानकारी जुटाई जा सके।

  • शुरुआती शक: अमोनियम नाइट्रेट।
  • एजेंसियों का अंदेशा: ANFO (अमोनियम नाइट्रेट फ्यूल ऑयल) का इस्तेमाल हो सकता है।
  • FSL रिपोर्ट: असली तस्वीर FSL रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी, जिसकी पहली रिपोर्ट आज आने की उम्मीद है।

फरीदाबाद मॉड्यूल और स्लीपर सेल

पुलिस को शक है कि इस पूरी साजिश के पीछे ‘फरीदाबाद मॉड्यूल’ का हाथ है। जांच एजेंसियों का मानना है कि फरीदाबाद में किसी स्लीपर सेल ने डॉ. मुजम्मिल (एक अन्य संदिग्ध) की मदद की थी, ताकि वह इतनी बड़ी मात्रा में विस्फोटक जमा कर सके। पुलिस अब डॉ. उमर के अलावा मुजम्मिल के मददगारों की भी तलाश कर रही है। इसी सिलसिले में तारिक और आमिर नाम के दो अन्य लोगों को पूछताछ के लिए श्रीनगर ले जाया गया है।

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