Fake Reviews-कल्पना कीजिए, दीवाली की चांदनी रात में आपका नया स्मार्टफोन पहली बार चालू करते ही खराब हो जाता है। धुंआ निकलता है, घर में हड़कंप मच जाता है। क्यों? क्योंकि आपने अमेज़न पर ‘बेस्ट डील’ वाले प्रोडक्ट को चुना था, जहां 5-स्टार रेटिंग्स की भरमार थी। लेकिन हकीकत? वो रिव्यूज़ फर्जी थे – पैसे देकर खरीदे गए झूठ! X पर एक यूज़र ने चीखकर कहा: “@PallavBihani और @Boldfit_India फर्जी अमेज़न रिव्यूज़ खरीदकर छोटे फिटनेस ब्रांड्स को कुचल रहे हैं!” वॉइस रिकॉर्डिंग्स में साफ सुनाई देता है – ‘रिव्यू एक्सपर्ट्स’ सिर्फ 100 रुपये में 5-स्टार कमेंट बेच रहे हैं। ये कोई एक ट्वीट नहीं, लाखों ग्राहकों का त्योहारी दर्द है, जहां खुशी के बजाय धोखा मिलता है।
भारत का ई-कॉमर्स बाजार 2024 में 100 अरब डॉलर का था, जो 2029 तक 300 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है। लेकिन इस चमक के पीछे फेक रिव्यूज़ का काला साया है। लोकलसर्कल्स के सर्वे के मुताबिक, 56% ऑनलाइन शॉपर्स मानते हैं कि रेटिंग्स में सकारात्मक पक्षपात है। क्या ये 5-स्टार रेटिंग्स असली हैं या पेड प्रॉमोशन? इस स्टोरी में हम खोलेंगे डेटा, रीयल केस, एक्सपर्ट राय और बचाव के टिप्स। आखिर, फेक रिव्यूज़ की समस्या इतनी गहरी क्यों हो गई?
फेक रिव्यूज़: एक बढ़ता खतरा
फेक रिव्यूज़ वो झूठे कमेंट्स या रेटिंग्स हैं जो प्रोडक्ट बेचने वाले खुद लिखवाते हैं या पैसे देकर खरीदते हैं। इसमें पेड रिव्यूज़, AI से बने कमेंट्स या सेलर्स के अपने रिव्यूज़ शामिल हैं। त्योहारी सेल्स में ये और खतरनाक हो जाते हैं, जहां जल्दबाजी में खरीदारी होती है। फेकस्पॉट के 2024 डेटा के अनुसार, 40% रिव्यूज़ फर्जी हो सकते हैं।

केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण (CCPA) की रिपोर्ट बताती है कि 2023 में फेक रिव्यूज़ 18% से बढ़कर 43% हो गए। ग्लोबली, 4% रिव्यूज़ फेक होने से सालाना 152 अरब डॉलर का नुकसान होता है। भारत में 2024 में 10,000 से ज्यादा शिकायतें नेशनल कंज्यूमर हेल्पलाइन (NCH) पर दर्ज हुईं। X पर एक यूज़र ने अमेज़न पर सस्ते प्रोडक्ट्स के फेक रिव्यूज़ का आरोप लगाया: “भारत में सस्ते प्रोडक्ट्स बेचकर और फर्जी रिव्यूज़ से छल…” ये ट्रिक छोटे ब्रांड्स को कुचलने के लिए इस्तेमाल होती है।
फेक रिव्यूज़ का काला कारोबार: कैसे बनते हैं ये?
फेक रिव्यूज़ बनाना अब आसान है। पहला तरीका है अंडरग्राउंड नेटवर्क्स। मिंट की रिपोर्ट के मुताबिक, बेंगलुरु जैसे शहरों में टेलीग्राम ग्रुप्स में ‘डील्स’ चलते हैं – रिव्यू लिखने के बदले रिफंड या एक्सचेंज। इन ग्रुप्स में 1000 से ज्यादा यूजर्स हैं, जहां मीडिएटर्स डिस्काउंट के नाम पर फर्जी रिव्यूज़ का सौदा करते हैं।
दूसरा, पेड सर्विसेज। एक रिव्यू के लिए सिर्फ 50-100 रुपये! X पर बोल्डफिट का केस इसका उदाहरण है – वॉइस रिकॉर्डिंग्स में साफ है कि हजारों 5-स्टार रिव्यूज़ खरीदे जा रहे हैं ताकि छोटे फिटनेस ब्रांड्स को मार्केट से बाहर किया जाए। तीसरा, AI टूल्स। 2024 में 40% फेक रिव्यूज़ AI से बने, जैसे “ग्रेट प्रोडक्ट, फास्ट डिलीवरी” वाले रटे-रटाए कमेंट्स। X पर एक पोस्ट में लिखा: “अमेज़न इंडिया पर असली रिव्यूज़ – ‘अच्छा प्रोडक्ट, थोड़ा महंगा लेकिन अच्छा।’ फेक रिव्यूज़ – 300 शब्दों का AI कचरा…”

उदाहरण लें तो फ्लिपकार्ट पर दो स्मार्टफोन्स के रिव्यूज़ में एक ही फोटो और टेक्स्ट – X पर यूज़र ने चिल्लाया: “@Flipkart क्या आप फर्जी रिव्यूज़ से लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं?” असर? छोटे ब्रांड्स का अनफेयर कॉम्पिटिशन। अमेज़न ने 2024 में 275 मिलियन फेक रिव्यूज़ ब्लॉक किए। लेकिन ये काफी नहीं।
ग्राहकों का भरोसा टूटा: रीयल स्टोरीज़ और नुकसान
फेक रिव्यूज़ से ग्राहकों को सबसे ज्यादा नुकसान होता है। गलत खरीदारी से 2022 में ग्लोबली 41 अरब डॉलर का फ्रॉड हुआ। भारत में 72% कंज्यूमर्स मानते हैं कि फेक रिव्यूज़ अब आम हैं। लोकलसर्कल्स के सर्वे में 48% शॉपर्स ने बताया कि उन्हें गलत प्रोडक्ट मिला, और 20% को नकली सामान।
केस स्टडी 1: फिटनेस प्रोडक्ट्स
अमेज़न पर बोल्डफिट ने फेक रिव्यूज़ से मार्केट कैप्चर किया। X पर यूजर ने लिखा: “हزارों फर्जी 5-स्टार रिव्यूज़ से छोटे ब्रांड्स को खत्म कर रहे हैं!” छोटे ब्रांड्स को अनफेयर कॉम्पिटिशन का सामना करना पड़ रहा है।
केस स्टडी 2: टाइमपीस खरीदारी
एक यूज़र ने अमेज़न से घड़ी ली, लेकिन फेक रिव्यूज़ की वजह से क्वालिटी खराब मिली। X पर पोस्ट: “फेक रिव्यूज़, खराब क्वालिटी प्रोडक्ट्स।” दीवाली पर ऐसी गलती कितना दुख देती है?
केस स्टडी 3: मोबाइल्स
फ्लिपकार्ट पर डुप्लिकेट रिव्यूज़ – एक ही टेक्स्ट सैकड़ों बार। CCPA की सेक्रेटरी निधि खरे कहती हैं: “फेक रिव्यूज़ ट्रस्ट तोड़ते हैं, ग्राहक सुरक्षा जरूरी।” त्योहारी सीजन में ये धोखा और गहरा हो जाता है।
कंपनियों और सरकार का जवाब: कार्रवाई हो रही है?
ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स अब जागे हैं। अमेज़न का दावा है कि 99% प्रोडक्ट्स पर ऑथेंटिक रिव्यूज हैं – 2024 में AI से लाखों फेक रिव्यूज़ ब्लॉक किए। फ्लिपकार्ट भी AI टूल्स से डिटेक्शन कर रहा है। लेकिन चुनौतियां बाकी हैं – वॉलंटरी कोड फेल हो रहा, शिकायतें 20% बढ़ीं।
सरकार ने 2022 में BIS गाइडलाइंस लाईं – पेड रिव्यूज पर बैन और स्पॉन्सर्ड रिव्यूज़ को लेबल करना जरूरी। 2024 में CCPA ने इन्हें मंडेटरी बनाने की प्लानिंग की, 50 करोड़ तक जुर्माना लगाने का प्रावधान। 2024 में 325 नोटिस जारी हुए, 1.19 करोड़ का पेनल्टी। लेकिन लोकलसर्कल्स के अनुसार, सिर्फ 9% प्लेटफॉर्म्स स्पॉन्सर्ड रिव्यूज़ मार्क करते हैं।
सतर्क रहें, धोखे से बचें
फेक रिव्यूज़ त्योहारी खुशी चुरा लेते हैं – ट्रस्ट टूटता है, कॉम्पिटिशन अनफेयर होता है, और ग्राहक नुकसान में। लेकिन उम्मीद है: कंपनियां AI से लड़ रही हैं, सरकार नियम सख्त कर रही है। अब आपकी बारी – स्मार्ट शॉपिंग से असली फायदा लें।
टिप्स:
- टूल्स यूज करें: ReviewMeta या Blackbird से रिव्यूज़ चेक करें।
- वेरिफाइड चेक: सिर्फ ‘वेरिफाइड बायर’ रिव्यूज देखें।
- नेगेटिव सर्च: सकारात्मक के साथ नेगेटिव रिव्यूज पढ़ें।
- क्रॉस-वेरिफाई: X या रेडिट पर रीयल ओपिनियन लें।
- शिकायत करें: NCH पर 1915 डायल करें।
2025 की सेल्स में सतर्क रहें – 5-स्टार रेटिंग न देखें, रीयल स्टोरी पढ़ें। दीवाली की रोशनी में धोखा न बर्दाश्त करें। क्या आपने कभी फेक रिव्यूज़ का शिकार हुआ? कमेंट्स में शेयर करें!
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. फेक रिव्यूज क्या हैं और इन्हें कैसे पहचानें?
फेक रिव्यूज़ वो झूठे कमेंट्स या रेटिंग्स हैं जो सेलर्स पैसे देकर या AI से बनवाते हैं ताकि प्रोडक्ट अच्छा लगे। पहचानने के लिए: अगर सारे रिव्यूज़ एक जैसे हों (जैसे “बहुत अच्छा प्रोडक्ट”), सभी 5-स्टार बिना नेगेटिव के हों, या रिव्यू देने वाले का नाम/फोटो नकली लगे। ReviewMeta जैसे टूल्स यूज करें – ये स्कोर बताते हैं कि कितने रिव्यूज़ असली हैं। त्योहारी सेल्स में ये आम हैं, क्योंकि लोग जल्दबाजी में चेक नहीं करते। मिसाल: फ्लिपकार्ट पर एक ही रिव्यू टेक्स्ट सैकड़ों प्रोडक्ट्स पर – ये साफ फर्जीवाड़ा है।
2. भारत में फेक रिव्यूज़ से कितना नुकसान होता है?
भारत में फेक रिव्यूज़ से भारी नुकसान है। 2024 में 10,000+ शिकायतें NCH पर आईं। ग्लोबली, 152 अरब डॉलर का लॉस फेक रिव्यूज़ से होता है। लोकलसर्कल्स के सर्वे में 48% शॉपर्स को गलत प्रोडक्ट मिला, 20% को नकली सामान। छोटे ब्रांड्स को भी नुकसान – बड़े सेलर्स फेक रिव्यूज से मार्केट कब्जाते हैं। CCPA की रिपोर्ट कहती है कि 43% रिव्यूज़ फेक हो सकते हैं, जो भारत के 300 अरब डॉलर के ई-कॉमर्स मार्केट (2029 तक) को खतरे में डालते हैं। मिसाल: बोल्डफिट जैसे ब्रांड्स फेक रिव्यूज़ से छोटे फिटनेस ब्रांड्स को कुचल रहे हैं।
3. अमेज़न या फ्लिपकार्ट पर फेक रिव्यूज कैसे रोकें?
प्लेटफॉर्म्स AI से फेक रिव्यूज पकड़ रहे हैं – अमेज़न ने 2024 में 275 मिलियन रिव्यूज ब्लॉक किए। लेकिन आप खुद सावधान रहें: सिर्फ ‘वेरिफाइड बायर’ रिव्यूज पढ़ें, नेगेटिव कमेंट्स सर्च करें, और X या रेडिट पर क्रॉस-चेक करें। शक हो तो NCH 1915 पर शिकायत करें। सरकार की BIS गाइडलाइंस पेड रिव्यूज़ बैन करती हैं, और CCPA 50 करोड़ तक जुर्माना लगाती है। लेकिन नियमों का अमल बढ़ाना होगा। मिसाल: X पर यूजर्स ने फ्लिपकार्ट पर डुप्लिकेट रिव्यूज़ की शिकायत की, जिसे प्लेटफॉर्म ने बाद में हटाया।
4. त्योहारी सेल्स में फेक रिव्यूज का खतरा क्यों ज्यादा?
दीवाली जैसे त्योहारों में डिस्काउंट का लालच और जल्दबाजी बढ़ जाती है, जिससे फेक रिव्यूज़ आसानी से काम करते हैं। फेकस्पॉट के मुताबिक, 40% रिव्यूज़ फर्जी हो सकते हैं। लोग स्मार्टफोन, गिफ्ट्स जैसी चीजें जल्दी खरीद लेते हैं। X पर बोल्डफिट का केस दिखाता है कि बड़े ब्रांड्स फेक रिव्यूज़ से छोटों को कुचलते हैं। बचाव: 24 घंटे रुककर चेक करें, और अगर संभव हो तो लोकल स्टोर्स से खरीदें। मिसाल: एक यूज़र ने X पर लिखा कि फेक रिव्यूज़ की वजह से दीवाली गिफ्ट खराब मिला।
