7 अगस्त 2025 को लोकसभा के नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में 2024 लोकसभा चुनावों में कर्नाटक में बड़े पैमाने पर मतदाता सूची धोखाधड़ी के जरिये वोट चोरी का आरोप लगाया। उन्होंने दावा किया कि 1,00,250 से अधिक वोट फर्जी थे, जिसमें 11,965 डुप्लिकेट मतदाता, 40,009 फर्जी पते, 10,452 एक ही पते पर कई मतदाता, 4,132 अवैध तस्वीरें, और 33,692 फॉर्म 6 (नए मतदाता पंजीकरण के लिए) का दुरुपयोग शामिल थे। गांधी ने निर्वाचन आयोग (ECI) पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ मिलीभगत का आरोप लगाया, इसे भारतीय संविधान के खिलाफ “विशाल आपराधिक धोखाधड़ी” बताया। उन्होंने कहा कि ECI ने जानबूझकर मशीन-पठनीय मतदाता सूची नहीं दी और इलेक्ट्रॉनिक डेटा या CCTV फुटेज साझा करने से इनकार किया।
राहुल गांधी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा था कि महाराष्ट्र में सिर्फ 5 महीनों में जितने नए मतदाता जोड़े गए, उतने पिछले 5 सालों में भी नहीं जोड़े गए थे। कई क्षेत्रों में जितने वोटर जोड़े गए, वे उन इलाकों की पूरी आबादी से भी ज्यादा थे। 5 बजे के बाद वोटिंग में अचानक जबरदस्त उछाल आया, लेकिन पोलिंग बूथों पर मतदाताओं की लाइनें नहीं थीं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि चुनाव आयोग ने मशीन-रीडेबल वोटर लिस्ट देने से मना कर दिया। अगर हमारे पास सॉफ्ट कॉपी होती तो हम पूरे डेटा को 30 सेकंड में एनालाइज कर सकते थे, लेकिन हमें कागज के सात-फुट लंबे बंडल मिले, जिन्हें पढ़ने और मिलाने में छह महीने लगे। सिर्फ एक विधानसभा सीट के लिए 30-40 लोगों की टीम ने दिन-रात काम किया। ईसी जानबूझकर ऐसा डेटा देता है, जिसे स्कैन कर पढ़ा न जा सके। ईसी ने सीसीटीवी फुटेज तक पहुंचने के नियम बदल दिए। इसके साथ ही चुनाव आयोग डिजिटल डेटा देने से इनकार करता है। ये सब इसलिए किया जा रहा है ताकि कोई जांच न कर सके।

चुनाव आयोग ने कहा – गुमराह कर रहे हैं राहुल, घोषणा या शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करके दें
गांधी द्वारा लगाए गए धांधली के आरोप को लेकर भारत निर्वाचन आयोग फैक्ट चेक ने जवाब दिया है। ईसीआई फैक्ट चेक ने राहुल गांधी के बयान को भ्रामक बताया। चुनाव आयोग फैक्ट चेक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर पोस्ट कर कहा कि अगर राहुल गांधी मानते हैं कि वे जो कह रहे हैं, वह सच है तो उन्हें मतदाता पंजीकरण नियम 1960 के 20(3)(बी) के अनुसार घोषणा या शपथ पत्र पर हस्ताक्षर करके महाराष्ट्र के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को प्रस्तुत करना चाहिए ताकि आवश्यक कार्यवाही शुरू की जा सके। उन्होंने आगे कहा कि यदि राहुल गांधी अपनी बातों पर विश्वास नहीं करते हैं तो उन्हें बेतुके निष्कर्षों पर पहुंचना और भारत के नागरिकों को गुमराह करना बंद कर देना चाहिए।
ECI और कर्नाटक, महाराष्ट्र, और हरियाणा के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों ने इन आरोपों को “निराधार” और “भ्रामक” बताया। ECI ने चेतावनी दी कि झूठा सबूत देना कानूनी परिणाम भुगत सकता है। गांधी ने जवाब दिया, “मैं एक राजनेता हूँ। मैं जो लोगों से कहता हूँ, वह मेरा वचन है। मैं इसे सार्वजनिक रूप से सभी से कह रहा हूँ। इसे शपथ के रूप में लें। राहुल गांधी ने कहा, “यह हमारा डेटा नहीं है। यह निर्वाचन आयोग का डेटा है। दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने जानकारी को नकारा नहीं है। उन्होंने यह नहीं कहा कि राहुल गांधी जिस मतदाता सूची की बात कर रहे हैं, वह गलत है। आप इसे गलत क्यों नहीं कहते? क्योंकि आप सत्य जानते हैं। आप जानते हैं कि हम जानते हैं कि आपने यह पूरे देश में किया है…”।
वोटर लिस्ट में फ्रॉड करने पर क्या हैं कानूनी प्रावधान?
वोटर लिस्ट धोखाधड़ी, जैसे डुप्लिकेट प्रविष्टियाँ, फर्जी पते, या फॉर्म 6 का दुरुपयोग, निम्नलिखित भारतीय कानूनों के तहत आता है:
- जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950:
- धारा 17: एक व्यक्ति का एक से अधिक निर्वाचन क्षेत्र में मतदाता के रूप में पंजीकरण निषिद्ध है।
- धारा 18: एक ही निर्वाचन क्षेत्र में एक से अधिक बार पंजीकरण निषिद्ध है।
- धारा 31: मतदाता सूची तैयार करने में जानबूझकर झूठा बयान देना अपराध है। सजा: एक वर्ष तक की कैद, जुर्माना, या दोनों।
- धारा 16: ECI को मतदाता सूची तैयार करने और संशोधन का अधिकार देता है।
- निर्वाचक पंजीकरण नियम, 1960:
- नियम 20(3)(b): पंजीकरण अधिकारी शपथ के तहत सबूत मांग सकता है। कर्नाटक CEO ने गांधी से फर्जी मतदाताओं के नाम के साथ शपथपत्र मांगा।
- फॉर्म 6: नए मतदाताओं के पंजीकरण के लिए। इसका दुरुपयोग (जैसे बुजुर्गों को “नया” मतदाता दिखाना) धारा 31 के तहत दंडनीय है।
- भारतीय न्याय संहिता (BNS), 2023:
- धारा 227: झूठा सबूत देना या गढ़ना। सजा: 7 वर्ष तक की कैद और 10,000 रुपये तक का जुर्माना। ECI ने चेतावनी दी कि झूठे आरोप इस धारा के तहत दंडनीय हैं।
- निर्वाचन याचिका (जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951):
- कर्नाटक CEO ने कहा कि चुनाव परिणाम को हाई कोर्ट में याचिका के माध्यम से चुनौती दी जा सकती है, लेकिन 2024 चुनाव के लिए यह समयसीमा समाप्त हो चुकी है।
यदि आरोप सही साबित हुए तो सजा
यदि गांधी के आरोप सत्य साबित होते हैं, तो निम्नलिखित सजा हो सकती है:
- फर्जी मतदाता सूची बनाने वालों के लिए:
- धारा 31, 1950 अधिनियम: एक वर्ष तक की कैद, जुर्माना, या दोनों।
- धारा 227, BNS 2023: यदि जानबूझकर सबूत गढ़े गए, तो 7 वर्ष तक की कैद और 10,000 रुपये तक का जुर्माना।
- निर्वाचन अधिकारियों को आपराधिक मुकदमा, निलंबन, या सेवा से हटाया जा सकता है।
- चुनाव परिणाम पर प्रभाव: हाई कोर्ट में याचिका के माध्यम से चुनाव रद्द हो सकता है या पुनर्मतदान हो सकता है।
- राहुल गांधी के लिए: यदि आरोप झूठे साबित हुए और उन्होंने शपथपत्र जमा किया, तो धारा 227 के तहत 7 वर्ष की कैद और जुर्माना हो सकता है।

विपक्ष हमलावर
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड्गे ने कहा, ” एक वक़्त था जब भारत के चुनाव आयोग की वाहवाही पूरे विश्व में होती थी। कितने ही देश हमारे चुनाव आयोग से निष्पक्ष चुनाव conduct करने की training लेते थे। जब कोई राजनीतिक दल चुनाव आयोग से सवाल पूछता था वो संविधान की मर्यादा के दायरे में उसका जवाब या स्पष्टीकरण देते थे। आज जब कोई ECI से सवाल पूछता है तो वो जवाब नहीं बल्कि सत्ता पक्ष के नुमायंदे की तरह उलटे इल्ज़ाम लगाता है, विपक्षी पार्टियों की माँगों पर गौर किये बिना केवल अनर्गल बयानबाज़ी करता है। आज RahulGandhi ने कर्नाटक की महादेवापुरा Assembly Segment के, गहन जाँच के बाद, उदहारण देकर, बताया कि किस तरह से चुनाव आयोग ने एक चुनाव में ही घोर धाँधली होने दी और अपने संवैधानिक कर्त्तव्य को तार-तार किया, जिसमें 1,00,250 वोटों की चोरी की गई। ये #VoteChori पूरे देश में Strategic तरीक़े से कई सीटों पर हो रही है। कांग्रेस पार्टी, इस पर जनता को जागरूक करेगी। कल कर्नाटक में बेंगलुरु के Freedom Park से हम शुरुआत करेंगे। अब समय आ गया लोकतंत्र और संविधान को बचाने के, देश बचाने का!”
राजस्थान में नेता प्रतिपक्ष टीका राम जूली ने x पर किये पोस्ट में लिखा: “नेता प्रतिपक्ष श्री राहुल गांधी जी लगातार वोटर लिस्ट में अनियमितताओं और चुनाव आयोग की इसमें मिलीभगत की बात उठा रहे थे। आज उन्होंने सबूतों के साथ इसका खुलासा किया है। यह तो केवल एक विधानसभा के सबूत सामने रखे गए हैं, पता नहीं ऐसा कितनी जगहों पर किया गया होगा? एक ही व्यक्ति द्वारा कई स्थानों पर वोट डालना, एक ही कमरे में दर्जनों लोगों का निवास दिखाना, 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों के वोट पहली बार वोट देने वालों में दिखाना, मतदाता के पिता के नाम और पते की जगह कोई भी बचकाना नाम दर्ज होना आदि स्पष्ट सबूत हैं कि चुनाव आयोग ने मिलीभगत से सत्ताधारी भाजपा के पक्ष में ऐसा काम किया है। जहां ऐसी गड़बड़ है वहां भाजपा ही क्यों चुनाव जीत रही है? क्या इसी वजह से मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस की जगह गृहमंत्री को लिया गया? क्या इसी वजह CCTV फुटेज डिलीट करने का नियम बनाया गया? श्री राहुल गांधी जी के इन खुलासों के बाद सभी देशवासियों के मन में ये सवाल उठ रहे हैं। गांधी ने पूरे सबूतों के साथ अपनी बात रखी है। 2024 के चुनाव में थोड़े से अंतर से जीती NDA सरकार अब मॉरल अथॉरिटी खो चुकी है।“
रिटायर्ड IAS अधिकारी सूर्यप्रताप सिंह ने कहा, “लोकतंत्र में ग़रीब के पास एक ही ताक़त है — उसका वोट। आरोप हैं, साक्ष्य भी हैं — फिर जांच से डर कैसा”
पब्लिक इंटरेस्ट लॉयर और एक्टिविस्ट प्रशांत भूषण ने कहा, ” कर्नाटक के सिर्फ़ एक निर्वाचन क्षेत्र में 1,00,00 से ज़्यादा फ़र्ज़ी मतदाताओं के नामांकन के बारे में राहुल गांधी द्वारा अपने निजी संवाददाता सम्मेलन में प्रस्तुत किए गए सबूत बेहद चौंकाने वाले और ज़बरदस्त हैं। इस पर जवाब देने के बजाय चुनाव आयोग ने बेशर्मी से अपनी बेशर्मी दिखा दी है। समय आ रहा है जब लोग इस बेईमान चुनाव आयोग के ख़िलाफ़ विद्रोह करेंगे। उन्हें जवाबदेह ठहराया जाएगा।”
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